Пеш аз рӯзӣ , ки хоки қолабам гул сохтанд

پیش از روزی، که خاک قالبم گل ساختند

Баҳри султони хаёлати кишвар дил сохтанд

بهر سلطان خیالت کشور دل ساختند

Сад ҳазорон офарин бар калаки наққошони сунъ

صد هزاران آفرین بر کلک نقاشان صنع

Каз гулу оби ин чунин шакл ва шамоил сохтанд

کز گل و آب این چنین شکل و شمایل ساختند

Хубрӯёнро ҷафо доданду истиғноу ноз

خوبرویان را جفا دادند و استغنا و ناز

Бар гирифторон , бғоит , кор мушкил сохтанд

بر گرفتاران، بغایت، کار مشکل ساختند

Кори мо ин буд каз хубон нигаҳ дорем дил

کار ما این بود کز خوبان نگه داریم دل

Оқибати моро зи кори хеш ғофил сохтанд

عاقبت ما را ز کار خویش غافل ساختند

Оҳ ! азин ҳасрат ки : ҳар ҷои хостами байнами Рахш

آه! ازین حسرت که: هر جا خواستم بینم رخش

Пеши чашми ман ҳазорон парда ҳоил сохтанд

پیش چشم من هزاران پرده حایل ساختند

Ҳар куҷои рафтанди хубон , ба шуд аз боғи биҳишт

هر کجا رفتند خوبان، به شد از باغ بهشت

Хоссаи он ҷое ки рӯзӣ чанд манзил сохтанд

خاصه آن جایی که روزی چند منزل ساختند

Май тапам , неи мурдау неи зинда , бар хок дараш

می تپم، نی مرده و نی زنده، بر خاک درش

Ҳамчуи он мурғӣ , ки ӯро ним бсмл сохтанд

همچو آن مرغی، که او را نیم بسمل ساختند

Манзари айши ҳилолӣ аз фалак бигузашта буд

منظر عیش هلالی از فلک بگذشته بود

Хайли андӯҳи ту бо хокаш муқобил сохтанд

خیل اندوه تو با خاکش مقابل ساختند