Ваа ! ки савдои ту охири сар бшидоиӣ кашид

وه! که سودای تو آخر سر بشیدایی کشید

Қиссаи ишқи ниҳони мо брсўоиӣ кашид

قصه عشق نهان ما برسوایی کشید

Охир , эй ҷон , рӯзӣ аз ҳоли дил зорам бипурс

آخر، ای جان، روزی از حال دل زارم بپرس

То бигӯям : ончӣ дар шабҳои танҳоӣ кашид

تا بگویم: آنچه در شبهای تنهایی کشید

Мекашанд аз доғи савдояти хирадмандони шаҳр

میکشند از داغ سودایت خردمندان شهر

Ончии маҷнӯни биёбони гирд саҳройӣ кашид

آنچه مجنون بیابان گرد صحرایی کشید

Ҳоли моу фитнаи чашм ту медонад ки чист ?

حال ما و فتنه چشم تو میداند که چیست

Ҳар ки рӯзии ғорати таркон яғмое кашид

هر که روزی غارت ترکان یغمایی کشید

Бандаи он сарви озодам , ки бар рухсори гул

بنده آن سرو آزادم، که بر رخسار گل

Холи раъноеи ниҳоду хат зебоӣ кашид

خال رعنایی نهاد و خط زیبایی کشید

Тоқат ҳиҷрон надорад нози пурвирди висол

طاقت هجران ندارد ناز پرورد وصال

Доғу дарди ишқро натавон бръноиӣ кашид

داغ و درد عشق را نتوان به رعنایی کشید

Сабр фармудани ҳилолиро мФрмо , эй табиб

صبر فرمودن هلالی را مفرما، ای طبیب

Зонка натавон беш азин ранҷ шикебе кашид

زانکه نتوان بیش ازین رنج شکیبایی کشید