Мардуми азин ?илам : ки намардум барои ту

مردم ازین الم: که نمردم برای تو

эй хок бар серум , ки нашуд хоки пои ту !

ای خاک بر سرم، که نشد خاک پای تو!

Гар ихтиёри марг бадастам диҳад қазо

گر اختیار مرگ بدستم دهد قضا

Рӯзии ҳазор бори бимирам барои ту

روزی هزار بار بمیرم برای تو

Ғам нестгар зи меҳри ту дили пора пора шуд

غم نیست گر ز مهر تو دل پاره پاره شد

эй кош ! зарра зарра шавад дар ҳавои ту

ای کاش! ذره ذره شود در هوای تو

Гӯям дуоу умр абад хоҳам аз худо

گویم دعا و عمر ابد خواهم از خدا

То умри хеш сарф кунам дар дуои ту

تا عمر خویش صرف کنم در دعای تو

Дар орзӯии онкӣ : бмни ошнои шӯй

در آرزوی آنکه: بمن آشنا شوی

Омехтам баҳр ки буд ошнои ту

آمیختم بهر که بود آشنای تو

Ҷои ту дар ҳарим висоласт , эй рақиб

جای تو در حریم وصالست، ای رقیب

эй кош ! будамӣ , ман бедил , биҷои ту

ای کاش! بودمی، من بیدل، بجای تو

Аз подшоҳии ҳамаи офоқи хўштрст

از پادشاهی همه آفاق خوشترست

Ин салтанат ки : гашти ҳилолии гадои ту

این سلطنت که: گشت هلالی گدای تو