Рафтӣ , эй моҳ , ки аз меҳр вафо ме кардӣ

رفتی، ای ماه، که از مهر وفا می‌کردی

Кош ! май будӣу сдгўнаҳ ҷафо ме кардӣ

کاش می‌بودی و صدگونه جفا می‌کردی،

Аз ту рӯзӣ ки ба сад дарди ҷудо май гаштам

از تو روزی که به صد درد جدا می‌گشتم

Кошкӣ ! банди ман аз банд ҷудо ме кардӣ

کاشکی بند من از بند جدا می‌کردی

Корам аз чора гузаштаст , тбибо , бархез

کارم از چاره گذشتست، طبیبا، برخیز

Пеши азин дарди марои кош ! даво ме кардӣ

پیش ازین درد مرا کاش دوا می‌کردی

Ёрб , он рӯз куҷо шуд ки ту аз гӯшаи чашм

یارب، آن روز کجا شد که تو از گوشه چشم

Гоҳ гоҳе назарии ҷониб мо мекардӣ ?

گاه‌گاهی نظری جانب ما می‌کردی؟

Шоҳи хубонеу фикри ман ва дарвешат нест

شاه خوبانی و فکر من درویشت نیست

Ваа ! чаҳ май буд ки пурвой гадо мекардӣ ?

وه! چه می‌بود که پروای گدا می‌کردی؟

Чун турои тоқат озор набӯдаст , эй дил

چون ترا طاقت آزار نبودست، ای دل

Майли хубони дили озор чаро мекардӣ ?

میل خوبان دل‌آزار چرا می‌کردی؟

эй хуши он рӯз , ҳилолӣ , ки ба хлўтгаҳи ноз

ای خوش آن روز، هلالی، که به خلوتگه ناز

Ёри дашном ту мегуфт ва дуо ме кардӣ

یار دشنام تو می‌گفت و دعا می‌کردی