Ба раҳати з рашк меРом , чу ба ғайри ҳамраҳи ое

به رهت ز رشک میرم، چو به غیر همره آیی

На таҳаввури тағофул , на маҷоли ошноӣ

نه تهور تغافل، نه مجال آشنایی

Мутаҳайирам ки : пешат чаҳ маҷол буд дӯшам ?

متحیرم که: پیشت چه مجال بود دوشم؟

Ки на шукр васл кардам , на шикояти ҷудоӣ

که نه شکر وصل کردم، نه شکایت جدایی

Маи ман , ҳануз тифлӣ , ба ҷафо мабош моил

مه من، هنوز طفلی، به جفا مباش مایل

Ки табиати ту одат накунад ба бе вафое

که طبیعت تو عادت نکند به بی‌وفایی

Талаб висол кардам зи назари Фгнди ёрам

طلب وصال کردم ز نظر فگند یارم

Чаҳ кунам ? ки хори гаштами зи мазаллати гадоӣ

چه کنم؟ که خوار گشتم ز مذلت گدایی