То дасти дилами домани дилдори гирифтаи сет
تا دست دلم دامن دلدار گرفتهست
Ҷон дар назари ёри вафодори гирифтаи сет
جان در نظر یار وفادار گرفتهست
Тарсам ки ҷаҳони ҷумла ба якбор бисӯзад
ترسم که جهان جمله به یکبار بسوزد
Котши зи дилам дар дару девори гирифтаи сет
کآتش ز دلم در در و دیوار گرفتهست
Он пер ки бади мӯътакифи масҷиди ҷомеъ
آن پیر که بد معتکف مسجد جامع
Имрӯзи ватан бар дар хумори гирифтаи сет
امروز وطن بر در خمار گرفتهست
эй сайқалён ! зангаши азин дил бизадойед
ای صیقلیان! زنگش ازین دل بزدایید
Кони оина ҳайфаст ки зангори гирифтаи сет
کآن آینه حیف است که زنگار گرفتهست
Гуфтӣ ки гирифтӣ накунам гар бихӯрӣ май
گفتی که گرفتی نکنم گر بخوری می
Чунаст ки имрӯзи дгрбори гирифтаи сет ?
چون است که امروز دگربار گرفتهست؟
Он кӯ ба ҳама умр нашуд ошиқи рӯе
آن کو به همه عمر نشد عاشق رویی
Диқ бар ман мискини гирифтори гирифтаи сет
دق بر من مسکین گرفتار گرفتهست
Ёрон ! ба сари ёр ки дар олами маънӣ
یاران! به سر یار که در عالم معنی
Ҳайдари дилаш аз мардуми ағёри гирифтаи сет
حیدر دلش از مردم اغیار گرفتهست