Соқӣ ! бидиҳ он бода ки ҳангом баҳораст
ساقی! بده آن باده که هنگام بهارست
Саҳни чаман аз сунбулу гул чун рух ёраст
صحن چمن از سنبل و گل چون رخ یارست
Наргис ки буд бар каф ӯ соғари заррин
نرگس که بود بر کف او ساغر زرین
Чун наргиси махмури ту дар айн хумораст
چون نرگس مخمور تو در عین خمارست
Вақти гул агар даст диҳад ёри гули андом
وقت گل اگر دست دهد یار گل اندام
Май нӯш ки ҳангом майу бӯс ва канораст
می نوش که هنگام می و بوس و کنارست
Дар сина ӣ ушшоқи зи осеби ҳавоӣ
در سینه ی عشاق ز آسیب هوایی
эй себи занхдон , ту чаҳ доне ки чаҳ норст
ای سیب زنخدان، تو چه دانی که چه نارست
Рухсора ӣ дилҷӯии ту ё боғ биҳишт аст
رخساره ی دلجوی تو یا باغ بهشت است
Буии шикани зулфи ту ё бод баҳораст ?
بوی شکن زلف تو یا باد بهارست؟
Рӯй чамани имрӯзи зи машшота ӣ наврӯз
روی چمن امروز ز مشاطه ی نوروز
Чун рӯй нигорин ту пурнақш ва нигораст
چون روی نگارین تو پرنقش و نگارست
Аз бода малулем ки дар соғар ом аст
از باده ملولیم که در ساغر عام است
Ваз гул бибаредем ки ҳамсуҳбат хораст
وز گل ببریدیم که همصحبت خارست
Булбул ! на туе ошиқу девона ба танҳо
بلبل! نه تویی عاشق و دیوانه به تنها
Бар чеҳра ӣ гули ошиқ ва девона ҳазораст
بر چهره ی گل عاشق و دیوانه هزارست
Ҳайдари зи ҳавои сари зулфи ту ба олам
حیدر ز هوای سر زلف تو به عالم
Чун боди сабои дили сабк ва шефта кораст
چون باد صبا دل سبک و شیفته کارست