Ба ноз агар з дар он сарви ноз боз ояд
به ناز اگر ز در آن سرو ناز باز آید
Ба сайд кардани мурғи дилам чу боз ояд
به صید کردن مرغ دلم چو باز آید
Ба ноз дар чамани ҷон худ кунам ҷояш
به ناز در چمن جان خود کنم جایش
Агар ба тарафи чамани ҳамчуи сарв ноз ояд
اگر به طرف چمن همچو سرو ناز آید
Ба маҷлисӣ агар он равадро ба чанги орм
به مجلسی اگر آن رود را به چنگ آرم
Чу равад , кори ман бенаво бисоз ояд
چو رود، کار من بی نوا بساز آید
Касе ки дида ба миҳроби абрӯяти афканд
کسی که دیده به محراب ابرویت افکند
Ба пеши қибла ӣ рӯй ту дар намоз ояд
به پیش قبله ی روی تو در نماز آید
Бар онкии рӯзи рахтро шабӣ назора кунад
بر آنکه روز رخت را شبی نظاره کند
Дили рамида ӣ ман дар шаб дароз ояд
دل رمیده ی من در شب دراز آید
Ҳар онкии ришта ӣ меҳри ту дар дилаш бошад
هر آنکه رشته ی مهر تو در دلش باشد
Чу шамъ аз оташи меҳри ту дар гудоз ояд
چو شمع از آتش مهر تو در گداز آید
зи ғуссаи ҳайдари ошуфтаи дил ба пои талаб
ز غصه حیدر آشفته دل به پای طلب
Ҳамеша бар сари кӯии ту аз ниёз ояд
همیشه بر سر کوی تو از نیاز آید