Бози азин воқеаи моро дилу ҷон май сӯзад
باز ازین واقعه ما را دل و جان میسوزد
На дили мо , ки дили халқи ҷаҳон май сӯзад
نه دل ما، که دل خلق جهان میسوزد
Гўиёи оташи дӯзах ба ҷаҳон дар зада анд
گوییا آتش دوزخ به جهان در زدهاند
Ки дили марду зану перу ҷавон май сӯзад
که دل مرد و زن و پیر و جوان میسوزد
Чанг дар чанги мғнии з дарун ме нолад
چنگ در چنگ مغنی ز درون مینالد
Шамъ дар маҷлиси мо гиряи кунон май сӯзад
شمع در مجلس ما گریهکنان میسوزد
На манам сӯхта дар даҳр ки аз оташи меҳр
نه منم سوخته در دهر که از آتش مهر
Дили чарх аз ғами султони ҷаҳон май сӯзад
دل چرخ از غم سلطان جهان میسوزد
Бўсъиди он шаҳи фаррухи рухи фархундаи висол
بوسعید آن شه فرخرخ فرخندهوصال
Онкӣ дар мотам ӯ куну макон май сӯзад
آنکه در ماتم او کون و مکان میسوزد
Шоҳ дар хоки ниҳоди ин фалаки чобуки сайр
شاه در خاک نهاد این فلک چابک سیر
Дар ҳамаи ҷойгаҳии оташ аз он май сӯзад
در همه جایگهی آتش از آن میسوزد
Ошиқи сӯхта боанда ва ғам ме созад
عاشق سوخته با انده و غم میسازد
Ҳайдари хастаи дил аз ишқи фалон май сӯзад
حیدر خستهدل از عشق فلان میسوزد