Олимиро ба ҷамолати нигарон май байнам

عالمی را به جمالت نگران می‌بینم

На бад-ӣни дили нигаронӣ ки ман мискинам

نه بدین دل نگرانی که من مسکینم

Магарами дасти аҷал аз сар по бинишонад

مگرم دست اجل از سر پا بنشاند

Вар на то ҳаст қадам аз талабат нанишинам

ور نه تا هست قدم از طلبت ننشینم

Бар сари кӯии ту ё сари бунаам ё бошад

بر سر کوی تو یا سر بنهم یا باشد

Остони ту шабӣ то ба саҳари болинам

آستان تو شبی تا به سحر بالینم

Сангҳоӣ ки қадами гоҳ ту бошад

سنگ‌هایی که قدمگاه تو باشد آن شب

Лаъл ва ёқӯт кунам аз мижаи хунинам

لعل و یاقوت کنم از مژه خونینم

Мазҳабами ошиқӣу қиблаи ман рӯй ту шуд

مذهبم عاشقی و قبله من روی تو شد

Ман аз ин мазҳаб агар давр шавам бе дайнам

من از این مذهب اگر دور شوم بی‌دینم

На чунон фитнаи он шаклу шамоил шуда ам

نه چنان فتنه آن شکل و شمایل شده‌ام

Ки буд азми тамошои гулу насринам

که بود عزم تماشای گل و نسرینم

Ғайрат ояд назарамро ба ғаромат гирад

غیرت آید نظرم را به غرامت گیرد

Бе тугар сарви равон ё гули хандони байнам

بی تو گر سرو روان یا گل خندان بینم

Ба гадоён нарасад он лаби ширини борӣ

به گدایان نرسد آن لب شیرین باری

Ту сухани гӯй ки то ман шукрӣ май чинам

تو سخن گوی که تا من شکری می‌چینم

Хушам ояд суханати вари ҳамаи дашноми диҳӣ

خوشم آید سخنت ور همه دشنام دهی

Офарин бар лабати он дам ки кунӣ нафринам

آفرین بر لبت آن دم که کنی نفرینم

Зон ҳаловат ки зи васфи ту даҳонам ёбад

زان حلاوت که ز وصف تو دهانم یابد

наметавон дид асарӣ дар сухани ширинам

می‌توان دید اثری در سخن شیرینم

Дод ҳасани ту малоҳат ба ғазал ҳои ҳамам

داد حسن تو ملاحت به غزل‌های همام

Чун бихонам дар ва девор кунад таҳсинам

چون بخوانم در و دیوار کند تحسینم