Мштоби сорибон ки марои пой дар гул аст

مشتاب ساربان که مرا پای در گل است

Дар гарданами зи ҳалқаи зулфаш слосл аст

در گردنم ز حلقه زلفش سلاسل است

Таъҷил мекунӣ ту ва поем наме равад

تعجیل می‌کنی تو و پایم نمی‌رود

Берун шудани зи манзили асҳоб мушкил аст

بیرون شدن ز منزل اصحاب مشکل است

Ширинии висол чу бе талхии фироқ

شیرینی وصال چو بی‌تلخی فراق

Касро насиб нест зи даврон чаҳ ҳосил аст

کس را نصیب نیست ز دوران چه حاصل است

Чун оқибати зи суҳбати ёрон баридании сет

چون عاقبت ز صحبت یاران بریدنی‌ست

Пайванд бо касе накунад ҳар ки оқил аст

پیوند با کسی نکند هر که عاقل است

Рӯзи видоъ ғарқа хӯнанд ошиқон

روز وداع غرقة خونند عاشقان

Ваон ков назора мекунад аз давр ғофил аст

وان کاو نظاره می‌کند از دور غافل است

Моро хаёли дӯст ба фарёд ме расад

ما را خیال دوست به فریاد می‌رسد

Вар на фироқи суҳбат ӯ заҳр қотил аст

ور نه فراق صحبت او زهر قاتل است

Ҳар ҷо ки менишинам ва чандон ки май рӯм

هر جا که می‌نشینم و چندان که می‌روم

Дар гарданами ду дасти хаёлаш ҳамоил аст

در گردنم دو دست خیالش حمایل است

Аз дидаҳамам хаёлаш наме равад

از دیدة همام خیالش نمی‌رود

Онҷо фироқ нест ки пайванд бо дил аст

آنجا فراق نیست که پیوند با دل است