Маро чу номи лабат бар сар забон ояд

مرا چو نام لبت بر سر زبان آید

зи завқи он суханами об дар даҳон ояд

ز ذوق آن سخنم آب در دهان آید

Дар он нафас ки зи рӯят ҳикоятӣ гӯям

در آن نفس که ز رویت حکایتی گویم

з ҳар нафас ки занами буи гулистон ояд

ز هر نفس که زنم بوی گلستان آید

Ба шарҳи зулфи дарози ту дар наме печам

به شرح زلف دراز تو در نمی‌پیچم

Ки зон ҳазор гиреҳ бар сар забон ояд

که زان هزار گره بر سر زبان آید

Зиҳии гарон ки нагардад хароби он соъат

زهی گران که نگردد خراب آن ساعت

Ки чашми масти ту аз хоб саргарон ояд

که چشم مست تو از خواب سرگران آید

Чу он даҳони нгшоинди ҳеҷ танги шукр

چو آن دهان نگشایند هیچ تنگ شکر

Ҳазор сол агар аз Миср корвон ояд

هزار سال اگر از مصر کاروان آید

Агар ба дашти муғелон гузар кунӣ рӯзӣ

اگر به دشت مغیلان گذر کنی روزی

Ба ҷои хори гули сурх ва арғавон ояд

به جای خار گل سرخ و ارغوان آید

зи абрӯӣ ту нтобам ба ҳеҷ ваҷҳе рӯй

ز ابروی تو نتابم به هیچ وجهی روی

Агар чаҳ бар дили ман тир аз он камон ояд

اگر چه بر دل من تیر از آن کمان آید

Ба ҷусту ҷӯии ту корами ҳаме ба ҷон барисед

به جست و جوی تو کارم همی به جان برسید

Касе ки толиби ҷонон буд ба ҷон ояд

کسی که طالب جانان بود به جان آید

Куҷо расад ба шабистон ҳар гадои шамъӣ

کجا رسد به شبستان هر گدا شمعی

Ки лоиқи назари хусрав ҷаҳон ояд

که لایق نظر خسرو جهان آید