Вақте назари бтлъти манзури доштам

وقتی نظر بطلعت منظور داشتم

Бо он парии фароғатӣ аз ҳури доштам

با آن پری فراغتی از حور داشتم

Шабҳо зи акси чеҳра чун офтоб ӯ

شبها ز عکس چهره چون آفتاب او

Монанди моҳи машъалаи нури доштам

مانند ماه مشعله نور داشتم

ӯ шоҳи малики ҳасан ва ман аз меҳр рӯй ӯ

او شاه ملک حسن و من از مهر روی او

Раъии муниру раъйати Мансури доштам

رأی منیر و رأیت منصور داشتم

Бо пистаи даҳону лаб ӯ фароғатӣ

با پسته دهان و لب او فراغتی

Аз фикри нақлу бодаи ангури доштам

از فکر نقل و باده انگور داشتم

Дардо ки он табиби масеҳо нафас накард

دردا که آن طبیب مسیحا نفس نکرد

Андешае ки ошиқи ранҷури доштам

اندیشه ای که عاشق رنجور داشتم

Оё буд ки назд ман ояд з рӯй меҳр

آیا بود که نزد من آید ز روی مهر

Моҳӣ ки бар Рахши назар аз даври доштам

ماهی که بر رخش نظر از دور داشتم

Аз ашки сурху чеҳраи зардам фасона шуд

از اشک سرخ و چهره زردم فسانه شد

Розӣ ки дар дил аз ҳамаи мастури доштам

رازی که در دل از همه مستور داشتم

намеёфт қӯти рӯҳи зи ёқӯт ӯ ҳусайн

می یافت قوت روح ز یاقوت او حسین

Назмӣ аз он чу лؤлؤи мансури доштам

نظمی از آن چو لؤلؤ منثور داشتم