Маро то кӣ з ҳиҷронат бисӯзад ҷон ба танҳоӣ
مرا تا کی ز هجرانت بسوزد جان به تنهایی
Чаҳ шуд эй ҷони ширинам ки як соъат наме ое
چه شد ای جان شیرینم که یک ساعت نمیآیی
Ҷаҳон шуд тираи давр аз ту биё эй мӯниси ҷонам
جهان شد تیره دور از تو بیا ای مونس جانم
Ки чун хуршеди оламро ба як партави бёроиӣ
که چون خورشید عالم را به یک پرتو بیارایی
Ба рӯяти ҷон барафшондани зи ман шояд ки муштоқам
به رویت جان برافشاندن ز من شاید که مشتاقم
Ба ғамзаи бедилони куштани турои зебад ки зебоӣ
به غمزه بیدلان کشتن ترا زیبد که زیبایی
Чаҳ бим аз оташи сӯзони хаёлат бо ман ар созад
چه بیم از آتش سوزان خیالت با من ار سازد
Чаҳ суд аз равзаи ризвон агар дидор бинмое
چه سود از روضه رضوان اگر دیدار بنمایی
Ниқоб шаб биравӣ худ кашад хуршед аз хиҷлат
نقاب شب بروی خود کشد خورشید از خجلت
Ту эй моҳи малики симо чу аз рух парда бигушое
تو ای ماه ملکسیما چو از رخ پرده بگشایی
Шудам хок ва ҳануз аз ҷони ҳавои дӯст май варзам
شدم خاک و هنوز از جان هوای دوست میورزم
Надорам ҳосил аз гетӣ ба ғайр аз бодпимоиӣ
ندارم حاصل از گیتی به غیر از بادپیمایی
Ба умеди висол ӯ тасаллӣ май даҳуми дил ро
به امید وصال او تسلی میدهم دل را
Вале то васли дармонами ту эй умрам наме пое
ولی تا وصل درمانم تو ای عمرم نمیپایی
Чу омад бодаи софӣ чаҳ ҷои зуҳд эй сӯфӣ
چو آمد باده صافی چه جای زهد ای صوفی
Чу бошад ёри ман соқӣ куҷо бошад шикебе
چو باشد یار من ساقی کجا باشد شکیبایی
Ҷунуни ишқи пӯшидани ҳусайн акнӯн наме ёрад
جنون عشق پوشیدن حسین اکنون نمییارد
Чу тоқат тоқ шуд дилро براردи сар ба шайдое
چو طاقت طاق شد دل را برآرد سر به شیدایی