Дӯш аз ҳузури ту дили мо хуш сарвар дошт

دوش از حضور تو دل ما خوش سرور داشت

Вази манзари ту чашми назари боз нур дошт

وز منظر تو چشم نظر باز نور داشت

Дар кунҷи ин харобаи дилам бо ту эй парӣ

در کنج این خرابه دلم با تو ای پری

Неи орзӯии равза на савдоӣ ҳур дошт

نی آرزوی روضه نه سودای حور داشت

Бар хизмати ту суҳбати ҳури биҳишт ро

بر خدمت تو صحبت حور بهشت را

Зоҳид аз он гузид ки ақлаш қусӯр дошт

زاهد از آن گزید که عقلش قصور داشت

Чун дида дид моҳи ҷамолат зиёда шуд

چون دیده دید ماه جمالت زیاده شد

Меҳрӣ ки бо ту ҷони стмкши з давр дошт

مهری که با تو جان ستمکش ز دور داشت

Аз партави таҷаллии анвори оризат

از پرتو تجلی انوار عارضت

Ҳам дидаи рўшноӣӣ ва ҳам дил сарвар дошт

هم دیده روشنائی و هم دل سرور داشت

Шаб то саҳари зи шоми хату субҳи оризат

شب تا سحر ز شام خط و صبح عارضت

Хотири ҳамон ҳикояти Мӯсо ва тавр дошт

خاطر همان حکایت موسی و طور داشت

Дар ҳалқаҳои зулфи парешони дилкашат

در حلقه های زلف پریشان دلکشت

То бомдоди ҳалқаи дилҳо ҳузур дошт

تا بامداد حلقه دلها حضور داشت

намеёфт гӯши ҷони ман аз савти длгшт

می یافت گوش جان من از صوت دلگشت

Он лиззатӣ ки нағмаи соҳиб збўр дошт

آن لذتی که نغمه صاحب زبور داشت

Имрӯзи ҳосидони ту дар мотаманд аз онк

امروز حاسدان تو در ماتمند از آنک

Бо ту ҳусайни длшдаҳи дӯшина сур дошт

با تو حسین دلشده دوشینه سور داشت