Ман андари кори ишқаш чанд кӯшам

من اندر کار عشقش چند کوشم

Қабои сабзи сабраш чанд пӯшам

قبای سبز صبرش چند پوشم

Ба фарёди дилами рас каз ғами ту

به فریاد دلم رس کز غم تو

Гузашт аз сақфи миногўни хурӯшам

گذشت از سقف میناگون خروشم

Ба ҷон омад дилам аз дарди даврӣ

به جان آمد دلم از درد دوری

Бигӯ заҳри фироқат чанд нӯшам

بگو زهر فراقت چند نوشم

Ба буии зулфи ту ошуфтаи ҳолам

به بوی زلف تو آشفته حالم

Ба ёди чашми мастат май фурушам

به یاد چشم مستت مِیْ فروشم

Гар оем дар самоъи шавқаш аз пой

گر آیم در سماع شوقش از پای

Барандам аз ғами ишқат ба дӯшам

برندم از غم عشقت به دوشم

Набудам сари ишқат дар дили танг

نبودم سرّ عشقت در دل تنگ

Хабар дод аз ғами рӯяти сурӯшам

خبر داد از غم رویت سروشم

Ба умедӣ ки ёбам аз ту бӯе

به امّیدی که یابم از تو بویی

Ниҳода бар сари раҳи чашму гӯшам

نهاده بر سر ره چشم و گوشم

Ба ҷон омад дили ман аз ҷафоят

به جان آمد دل من از جفایت

Бигӯ андари вафоят чанд кӯшам

بگو اندر وفایت چند کوشم

Наме доне ки ишқи рӯят эй ҷон

نمی‌دانی که عشق رویت ای جان

Рабӯд аз ман ба як раҳи сабру ҳушам

ربود از من به یک ره صبر و هوشم