Ёрб ки ту бигушоӣ дар баста ба рӯем
یارب که تو بگشای در بسته به رویم
Ёрб назарӣ кун зи сари лутф ба сӯем
یارب نظری کن ز سر لطف به سویم
Дилбастау тани хаста з дардем ҳамеша
دلبسته و تن خسته ز دردیم همیشه
Донеи ту ҳамаи ҳоли дили ман чаҳ бигӯям
دانی تو همه حال دل من چه بگویم
Муҳтоҷ ба такрор набошад ғами дил ро
محتاج به تکرار نباشد غم دل را
Бар ашки ду чашмами назарии афкан ва рӯем
بر اشک دو چشمم نظری افکن و رویم
Ҳоли дили он хастаи маҷрӯҳ чаҳ пурсӣ
حال دل آن خسته مجروح چه پرسی
Дар чифтаи бозуии ҷафои ту чаҳ гӯям
در چفته بازوی جفای تو چه گویم
Гар зонкаҳ бигӯе ту ба тарки ман маҳҷӯр
گر زآنکه بگویی تو به ترک من مهجور
Ман тарки шаби васли ту эй дӯст нагӯям
من ترک شب وصل تو ای دوست نگویم
Дар шиддати ҳиҷрони ту эй нури ду дида
در شدّت هجران تو ای نور دو دیده
Аз нола шудам на?ил ва ман аз мӯя чу мӯем
از ناله شدم نال و من از مویه چو مویم
Бечораи дили ман ба ҷаҳон инс нагирад
بیچاره دل من به جهان انس نگیرد
То ҷаъди сари зулфи самани поши набавӣам
تا جعد سر زلف سمن پاش نبویم