Он чаҳ зулфаст ки аз оташи дил дар тобаст

آن چه زلفست که از آتش دل در تابست

Вон чаҳ чашмаст ки чун наргиси ту дар хобаст

وآن چه چشمست که چون نرگس تو در خوابست

« он на зулфасту баннои гӯш ки рӯзаст ва шабаст »

«آن نه زلفست و بنا گوش که روزست و شبست»

ё нае дӯст ки нилӯфартар дар обаст

یا نه ای دوست که نیلوفرِ تر در آبست

Оташӣ аз лаби лаълам ба дил ва ҷон зада Эй

آتشی از لب لعلم به دل و جان زده‌ای

Бо ҳамаи дарди алоҷи дил мо уннобаст

با همه درد علاج دل ما عنّابست

Дар ба рӯй ман длхстаҳ мабанд аз сари лутф

در به روی من دلخسته مبند از سر لطف

Ки ҳадисам ба лаби лаъли ту дар ҳар бобаст

که حدیثم به لب لعل تو در هر بابست

Он на болост магари қад санавбар бархест

آن نه بالاست مگر قدّ صنوبر برخاست

Каз балояши дили маҳҷӯри пар аз хунобаст

کز بلایش دل مهجور پر از خونابست

Анбари зулф ки бар оташи рухсори ниҳод

عنبر زلف که بر آتش رخسار نهاد

Зон сабаби ҷони ҷаҳон дар ғам ӯ пар тобаст

زان سبب جان جهان در غم او پر تابست