То кӣ кашам эй дӯсти з худ карда надомат
تا کی کشم ای دوست ز خود کرده ندامت
То чанд кашад дили зи ғами ишқи маломат
تا چند کشد دل ز غم عشق ملامت
Мустағриқ ғам гашта ба дарёии таҳайюр
مستغرق غم گشته به دریای تحیر
Бошад ки аз ин вартаи даройам ба саломат
باشد که از این ورطه درآیم به سلامت
Дарда ба ман ташнаи лаби обӣ ки азин беш
درده به من تشنه لب آبی که ازین بیش
Дар оташ ҳиҷрон натавон кард иқомат
در آتش هجران نتوان کرد اقامت
Бархез ба бустон ки сеӣ сарв нишастаст
برخیز به بستان که سهی سرو نشستهست
Бар хоки хиҷолати снмои зи он қаду қомат
بر خاک خجالت صنما زآن قد و قامت
Дили холи туро дид ва ба зулфи ту дар овехт
دل خال تو را دید و به زلف تو درآویخت
То оқибати аламри дрФтод ба домат
تا عاقبت الامر درافتاد به دامت
Мискини танам аз хок дарат барфаканд дил
مسکین تنم از خاک درت برفکند دل
То кушта шавад бар сари Кувайт ба аломат
تا کشته شود بر سر کویت به علامت
Аз дасти ту эй чархи сияҳ рӯй шабу рӯз
از دست تو ای چرخِ سیهروی شب و روز
Фарёди ҷаҳони сӯзи занам то ба қиёмат
فریاد جهان سوز زنم تا به قیامت