Шод бош эй дили саргашта ки ҷон боз ояд

شاد باش ای دل سرگشته که جان باز آید

Бори дигар ба тани мурдаи равон боз ояд

بار دیگر به تن مرده روان باز آید

Ёрб ин шаб чаҳ шабӣ бошад ва ин рӯз чаҳ рӯз

یارب این شب چه شبی باشد و این روز چه روز

Каз дирами субҳдами он рашки ҷинон боз ояд

کز درم صبحدم آن رشک جنان باز آید

Муҳаррамӣ нест маро назд ту ҷузи боди сабо

محرمی نیست مرا نزد تو جز باد صبا

Ки кунад ҳоли дилами арзу ниҳон боз ояд

که کند حال دلم عرض و نهان باز آید

Гирди ҳиҷрони амли тухми вафо кошта ам

گِرد هجران امل تخم وفا کاشته‌ام

Ба умедӣ ки магари оби равон боз ояд

به امیدی که مگر آب روان باز آید

Оннигор ар чаҳ раҳи ҷавру ҷафо пеш гирифт

آن نگار ار چه ره جور و جفا پیش گرفت

Дорам умед ба лутфаш ки аз он боз ояд

دارم امید به لطفش که از آن باز آید

Баъди сад сол агар бар сар хокам гузарад

بعد صد سال اگر بر سر خاکم گذرد

Ба тани хокии мо роҳати ҷон боз ояд

به تن خاکی ما راحت جان باز آید

Гўиё рӯз ҳисобаст ки ҷонам ба умед

گوییا روز حسابست که جانم به امید

Ба сӯии қолаби тани рақси кунон боз ояд

به سوی قالب تن رقص کنان باز آید

Ба ҷаҳон чун биҷуз аз ғусса надорам ҳосил

به جهان چون بجز از غصّه ندارم حاصل

Зуд бошад ки дил аз кори ҷаҳон боз ояд

زود باشد که دل از کار جهان باز آید

Чун равонами зи ғами ҳиҷри равони гашт аз тан

چون روانم ز غم هجر روان گشت از تن

Чаҳ шавадгар бар мо сарви равон боз ояд

چه شود گر بر ما سرو روان باز آید