Ки май барад ба сӯии дӯстони саломи ғарибон ?
که میبرد به سوی دوستان سلام غریبان؟
Ки май барад ба сӯии хону мони паёми ғарибон ?
که میبرد به سوی خان و مان پیام غریبان؟
Насими боди сабо ! назд ёри мо гузарӣ кун
نسیم باد صبا! نزد یار ما گذری کن
Ба дӯстони қадӣмии расони саломи ғарибон
به دوستان قدیمی رسان سلام غریبان
Ба вақти шоми ман хастаи зори зори бгрим
به وقت شام من خسته زار زار بگریم
Ки гиряи бештари оради намози шоми ғарибон
که گریه بیشتر آرد نماز شام غریبان
Замона ҳар нафасами шарбатӣ дигар диҳад аз ғам
زمانه هر نفسم شربتی دگر دهد از غم
Ки ҷои шарбати нокомии сети коми ғарибон
که جای شربت ناکامی ست کام غریبان
Маро ба ғурбат агар рӯз тирааст аҷаб нест
مرا به غربت اگر روز تیره است عجب نیست
Ки офтоб нтобад фарози боми ғарибон
که آفتاب نتابد فراز بام غریبان
зи тоби ғурбату ғами мавҷи хӯн ба авҷ барояд
ز تاب غربت و غم موج خون به اوج برآید
Ба пеши дидаи ман гар баранд номи ғарибон
به پیش دیده من گر برند نام غریبان
Ҷалол дорад умеди висоли ёр ва надорад
جلال دارد امید وصال یار و ندارد
Умеди он ки براردи замонаи коми ғарибон
امید آن که برآرد زمانه کام غریبان