Бакӯш то дили озурдае ба дасти оре

بکوش تا دل آزرده ای به دست آری

Ки аҳл дил напасанданд мардуми озорӣ

که اهل دل نپسندند مردم آزاری

Чаҳ суди ӯҳдаи аҳдӣ ки мекунӣ бо ман

چه سود عهده عهدی که می کنی با من

Ту аҳд мекунӣ аммо ба ҷо наме оре

تو عهد می کنی امّا به جا نمی آری

Агар ту ёри манӣ даври шӯи зи ағёрам

اگر تو یار منی دور شو ز اغیارم

На дӯстии сет ки бо душманон кунӣ ёрӣ

نه دوستی ست که با دشمنان کنی یاری

Ба даври наргиси махмури бодаи паймоят

به دور نرگس مخمور باده پیمایت

з рӯзгор барофтод номи ҳушёрӣ

ز روزگار برافتاد نام هشیاری

Ту ҳоли дӯши з ман пресс аз онкӣ то ба саҳар

تو حال دوش ز من پرس از آنکه تا به سحر

Туро ба хоби гузашту маро ба бедорӣ

ترا به خواب گذشت و مرا به بیداری

Ба зоҳирамнигарӣ сари сина кӣ доне

به ظاهرم نگری سرّ سینه کی دانی

Ки пораҳои диласт ин ки ашки пиндорӣ

که پاره های دل است این که اشک پنداری

Ҳануз бо ҳамаи сахтӣ умед ме дорам

هنوز با همه سختی امید می دارم

Ки ҳам ба рӯз мубаддил шавад шаби торӣ

که هم به روز مبدّل شود شب تاری

Агарчӣ бар сари хоками нишондае саҳл аст

اگرچه بر سر خاکم نشانده ای سهل است

Умед ҳаст ки бозами з хок бурдорӣ

امید هست که بازم ز خاک برداری

Биё ки дар қидмати ҷони даҳум ба осонӣ

بیا که در قدمت جان دهم به آسانی

Ки дар фироқи ту ҷон май даҳум ба душворӣ

که در فراق تو جان می دهم به دشواری

Ҷалол ! зӯру зар ва зорӣаст чораи васл

جلال! زور و زر و زاری است چاره وصل

Чу зӯр ва зар набӯд чора нест ҷузи зорӣ

چو زور و زر نبود چاره نیست جز زاری