Шӯридаи дили мо сар беҳбуд надорад
شوریده دل ما سر بهبود ندارد
Саргаштаи мо роҳ ба мақсӯд надорад
سرگشته ما راه به مقصود ندارد
Аз сӯзи ман сӯхтаи касро хабарӣ нест
از سوز من سوخته کس را خبری نیست
Оре чаҳ кунам ? оташи мо дӯд надорад
آری چه کنم؟ آتش ما دود ندارد
эй дӯст ба беҳудаи дил дӯст маёзор
ای دوست به بیهوده دل دوست میازار
Тарсам ки пушаймони шӯй ва суд надорад
ترسم که پشیمان شوی و سود ندارد
Касро накушод аз гиреҳи зулфи ту корӣ
کس را نگشاد از گره زلف تو کاری
Ҳиндӯ чаҳ аҷаб бошад агар ҷӯад надорад
هندو چه عجب باشد اگر جود ندارد
Ҳарҷо ки туе миҷмараи авд чаҳ ҳоҷат
هرجا که تویی مجمره عود چه حاجت
Бӯе ки ту дории нафас авд надорад
بویی که تو داری نفس عود ندارد
Бе силсилаи турраи ошуфтаи Лайлӣ
بی سلسله طرّه آشفته لیلی
Маҷнӯни парешони сар беҳбуд надорад
مجنون پریشان سر بهبود ندارد
Султон ба таҳқиқ Аёзаст ки дорад
سلطان به تحقیق ایاز است که دارد
Як банда чу Маҳмӯд ки Маҳмӯд надорад
یک بنده چو محمود که محمود ندارد
Ҷони ҳамдам лаълат шуду дили ҳам нафаси зулф
جان همدم لعلت شد و دل هم نفس زلف
Дили шод , ки ҷони мақсад мавҷӯд надорад
دل شاد، که جان مقصد موجود ندارد
Дили зулмати Искандару ҷони об Хизр ёфт
دل ظلمت اسکندر و جان آب خضر یافت
Ореи ҳамаи каси толеъ масъӯд надорад
آری همه کس طالع مسعود ندارد