Чун гузашт аз ҳади он ҷҳўду ъинод
چون گذشت از حد آن جحود و عناد
Шоҳи гуфтои худоати сабри дҳод
شاه گفتا خدات صبر دهاد
Чанд азин гуфту гӯии беҳуда
چند ازین گفت و گوی بیهوده
Ки забон зон мабод олӯда
که زبان زان مباد آلوده
Амри ман баҳр озмӯн шумост
امر من بهر آزمون شماست
На марои орзӯӣ хӯн шумост
نه مرا آرزوی خون شماست
Хостам то дарин фазои вуҷӯд
خواستم تا درین فضای وجود
Сари маълум ман шавад машҳӯд
سر معلوم من شود مشهود
Ончӣ донистаам чаҳ зин ва чаҳ шин
آنچه دانسته ام چه زین و چه شین
Аз шумо бинмш ба раъии алъайн
از شما بینمش به رأی العین
Ҳар чаҳ дар ҳар кадом мактум аст
هر چه در هر کدام مکتوم است
Пеши ман лоязол маълум аст
پیش من لایزال معلوم است
То зи қӯти ҳама ба феъл ояд
تا ز قوت همه به فعل آید
Зон сабаби амр ва наҳй май бояд
زان سبب امر و نهی می باید
Кӣ буд амри муқтазии мавҷӯд
کی بود امر مقتضی موجود
Феълҳоро дарин нишеман буд
فعل ها را درین نشیمن بود
Абди маъмур азон кунад бе мар
عبد مأمور ازان کند بی مر
Тарки ?утёни бмо ба иؤмр
ترک اتیان بما به یؤمر