Навҷуоне нахурда нашутур ғам

نوجوانی نخورده نشتر غم

Шуд гирифтори ишқи духтар ъам

شد گرفتار عشق دختر عم

Рӯзу шаб дар сарой ъам май буд

روز و شب در سرای عم می بود

Дар мақоми ризоӣ ъам май буд

در مقام رضای عم می بود

Дмбдм рӯй духтараш ме дид

دمبدم روی دخترش می دید

Мива аз боғи навбараш май чид

میوه از باغ نوبرش می چید

Буд шабҳо дар он нишемани роз

بود شبها در آن نشیمن راز

Бо шиканҳои зулф ӯ каҷаи боз

با شکنهای زلف او کجه باز

Лек доғаш чу сина сӯз афтод

لیک داغش چو سینه سوز افتاد

Каҷа ӯ ба рӯй рӯз афтод

کجه او به روی روز افتاد

Пеш ъам ошкор шуд розаш

پیش عم آشکار شد رازش

Дошт аз хона омадани бозаш

داشت از خانه آمدن بازش

Чанд рӯзи он ҷавони некӯ рӯй

چند روز آن جوان نیکو روی

Ки ба дидори ёр будаш хуй

که به دیدار یار بودش خوی

Чун бадал шуд висол ӯ ба фироқ

چون بدل شد وصال او به فراق

Меҳнаташи ҷуфти гашту тоқати тоқ

محنتش جفت گشت و طاقت طاق

Як шаб аз орзӯии дидораш

یک شب از آرزوی دیدارش

Кард манзил ба бому девораш

کرد منزل به بام و دیوارش

Хост аз меҳр рӯй равшан ӯ

خواست از مهر روی روشن او

Ки даройад чу ма ба равзан ӯ

که درآید چو مه به روزن او

Ногаҳонаш фиканд лағзиши пой

ناگهانش فکند لغزش پای

Аз лаби бом дар миёни сарой

از لب بام در میان سرای

Ъам зи афтоданаш чу гашти огоҳ

عم ز افتادنش چو گشت آگاه

Дздўорш гирифт ва дошт нигоҳ

دزدوارش گرفت و داشت نگاه

Бомдодаш ба шоҳи даврони барад

بامدادش به شاه دوران برد

Додхоҳон ба пеши султони барад

دادخواهان به پیش سلطان برد

Шоҳ пурсед азу ки эй авбош

شاه پرسید ازو که ای اوباش

Давр аз андешаи маъоду маош

دور از اندیشه معاد و معاش

Шаб ки рӯ дар раҳ хато рафтӣ

شب که رو در ره خطا رفتی

Ба сарои касон чаро рафтӣ

به سرای کسان چرا رفتی

Дид мискини ҷавон ки он на накӯаст

دید مسکین جوان که آن نه نکوست

Ки наад тӯҳматӣ ба домани дӯст

که نهد تهمتی به دامن دوست

Зад ба сари манзили маломати гом

زد به سر منزل ملامت گام

Ронад бар хештан ба дуздии ном

راند بر خویشتن به دزدی نام

Шоҳи баъд аз ҷавоби бшнидн

شاه بعد از جواب بشنیدن

Дод фармон ба даст баридан

داد فرمان به دست بریدن

Воқифӣ аз ҳақиқати он ҳол

واقفی از حقیقت آن حال

Рқъаҳ Эй кард сӯии шоҳи ирсол

رقعه ای کرد سوی شاه ارسال

К-эй ба ҳишмати зи хусравони Фоиқ

کای به حشمت ز خسروان فایق

Нест бар ошиқи ин ҷазои лоиқ

نیست بر عاشق این جزا لایق

Ошиқ аз шӯри ишқ маҷнӯн аст

عاشق از شور عشق مجنون است

Кори маҷнӯни зи шаръ берун аст

کار مجنون ز شرع بیرون است

Марди ошиқ на симу зари дуздад

مرد عاشق نه سیم و زر دزدد

Аз лаби ёри худ шукри дуздад

از لب یار خود شکر دزدد

Нест ҷузи дуздеи писандида

نیست جز دزدیی پسندیده

Омадани сӯии ёри дуздида

آمدن سوی یار دزدیده

Шаҳ чу мазмуни корро донист

شه چو مضمون کار را دانست

Ҳоли он дили фигорро донист

حال آن دل فگار را دانست

Гуфт бо ъам вай ки эй сираи мард

گفت با عم وی که ای سره مرد

Ин ҷавонро макаш ба меҳнату дард

این جوان را مکش به محنت و درد

Бугсал аз аҳди сусти пайвандӣ

بگسل از عهد سست پیوندی

Сарфарозяши даҳ ба фарзандӣ

سرفرازیش ده به فرزندی

Расму роҳ ситамгарӣ бигзор

رسم و راه ستمگری بگذار

Ҷавҳари худ ба ҷавҳарӣ бисипор

جوهر خود به جوهری بسپار

Гуфт ъам кӯ на лоиқаст маро

گفت عم کو نه لایق است مرا

На ҳариф мувофиқаст маро

نه حریف موافق است مرا

Шоҳ гуфт он ки ному нанги ту ҷуст

شاه گفت آن که نام و ننگ تو جست

Даст аз ному нанги баҳри ту шаст

دست از نام و ننگ بهر تو شست

Зу мўоФқтрии куҷои ёбӣ

زو موافقتری کجا یابی

Сари зи пайванд ӯ чаро тобӣ

سر ز پیوند او چرا تابی

Гуфт ъам кӯи фақир ва даст тиҳӣаст

گفت عم کو فقیر و دست تهیست

Мардро доғи фақри рӯи сиҳист

مرد را داغ فقر رو سیهیست

Шоҳи асбоби кор ҳар ду бсохт

شاه اسباب کار هر دو بساخت

Ба зару мол ҳар дуро бнўохт

به زر و مال هر دو را بنواخت

Ақди басти он ҷавону духтар ро

عقد بست آن جوان و دختر را

Сохт як ақди он ду гавҳар ро

ساخت یک عقد آن دو گوهر را