Шоириро ба хоҷаи мамдуҳ

شاعری را به خواجه ممدوح

Ки бар ӯ рехти бадараҳои футуҳ

که بر او ریخت بدره های فتوح

Рӯзии андари миён ниқор афтод

روزی اندر میان نقار افتاد

Ҳар дуро зон ниқор кор афтод

هر دو را زان نقار کار افتاد

Гуфт хоҷа ки шарми боди ту ро

گفت خواجه که شرم باد تو را

Зончаҳи гӯйӣ , намонад ёди ту ро

زانچه گویی، نماند یاد تو را

Зон ҳамаи зар ки орӣ аз ҳамаи айб

زان همه زر که عاری از همه عیب

Борҳои рехтами туро дар ҷайб

بارها ریختم تو را در جیب

Гуфт шоир ки рост май гӯйӣ

گفت شاعر که راست می گویی

Зини сухани роҳи рост май пўиӣ

زین سخن راه راست می پویی

Лек зон ғофилӣ ки ман кардам

لیک زان غافلی که من کردم

Ки туро қибла сухан кардам

که تو را قبله سخن کردم

Шеър ман ҳаст мурғи фаррухи фол

شعر من هست مرغ فرخ فال

Вази мдиҳи ту номаҳоаш ба бол

وز مدیح تو نامه هاش به بال

Ту нишаста даруни дарвоза

تو نشسته درون دروازه

Карда аз ту ҷаҳони пуровоза

کرده از تو جهان پرآوازه

Зар ки додӣ ба ман худои гўост

زر که دادی به من خدای گواست

Ки азон як дирам намонда ба ҷост

که ازان یک درم نمانده به جاست

Он рафиқи ҳазор қофила рафт

آن رفیق هزار قافله رفت

Венаи зи роҳи шикам ба мзблаҳ рафт

وین ز راه شکم به مزبله رفت

Зон фурӯзад сухани гузори чароғ

زان فروزد سخن گزار چراغ

Зин бисӯзад ба раҳгузори димоғ

زین بسوزد به رهگذار دماغ

Зон ба сари тоҷ ифтихорат монад

زان به سر تاج افتخارت ماند

Зин ба фарқами ғубор ғорат монад

زین به فرقم غبار غارت ماند

Ҳар якеро захира чист бибин

هر یکی را ذخیره چیست ببین

Бо дили танг ва тира кист бибин

با دل تنگ و تیره کیست ببین