Ҳакимии зи мардум канорӣ гирифт

حکیمی ز مردم کناری گرفت

зи ғоратгарони кунҷ ғорӣ гирифт

ز غارتگران کنج غاری گرفت

Ҷузи он ғор оромгоҳӣ надошт

جز آن غار آرامگاهی نداشت

Ғизои ғайри барг гиёҳӣ надошт

غذا غیر برگ گیاهی نداشت

Чу карами бришми гёхўор буд

چو کرم بریشم گیاخوار بود

Ба тан аз луобаши яке тор буд

به تن از لعابش یکی تار بود

Гуруҳе ба он тори давр аз газанд

گروهی به آن تار دور از گزند

Ба қайди иродат шудаи пойбанд

به قید ارادت شده پایبند

Шаҳи кишвар аз маснади ъзу ноз

شه کشور از مسند عز و ناز

Бидон ғор шуд синаи пари ниёз

بدان غار شد سینه پر نیاز

Лақои ҳакимаш хуш омад чунон

لقای حکیمش خوش آمد چنان

Ки аз ишқ вай рафташ аз кафи Аннан

که از عشق وی رفتش از کف عنان

Бадв гуфт к-эии қиблаи мқблон

بدو گفت کای قبله مقبلان

Қабули ту иқболи соҳибдилон

قبول تو اقبال صاحبدلان

Дили ман асири каманд ту шуд

دل من اسیر کمند تو شد

Серуми пасти қадари баланд ту шуд

سرم پست قدر بلند تو شد

Ҳаёти абадро туе ҷони ман

حیات ابد را تویی جان من

Ҷудо аз ту бӯдан чаҳ имкони ман

جدا از تو بودن چه امکان من

Бен ғор манзилгаҳ аждаҳост

بن غار منزلگه اژدهاست

Ки аз бими мардум дар ӯ карда ҷост

که از بیم مردم در او کرده جاست

Туе халқро гашта умедгоҳ

تویی خلق را گشته امیدگاه

Чаҳ ҳоҷат ки оре ба ӣнҷои паноҳ

چه حاجت که آری به اینجا پناه

Ту шоҳӣ ва аз рӯй ту шаҳри хуш

تو شاهی و از روی تو شهر خوش

Матоъи иқомати сӯии шаҳри каш

متاع اقامت سوی شهر کش

Агар ранҷасозӣ сӯии шаҳри пой

اگر رنجه سازی سوی شهر پای

Кунам баҳрати омодаи боғу сарой

کنم بهرت آماده باغ و سرای

Ғуломони хизматгар бо адаб

غلامان خدمتگر با ادب

Канизони симинбри нӯши лаб

کنیزان سیمینبر نوش لب

Дигар аз сабабҳои таййиби маош

دگر از سبب های طیب معاش

Ки ёбанд азон ҷисму ҷони антъош

که یابند ازان جسم و جان انتعاش

Бигуфто ки мехоҳам инҳо балӣ

بگفتا که می خواهم اینها بلی

Ки то бугзарад умри ман хуш вале

که تا بگذرد عمر من خوش ولی

Ба шартии зи ту гирами ин созу барг

به شرطی ز تو گیرم این ساز و برگ

Ки аз доманами бугсалии дасти марг

که از دامنم بگسلی دست مرگ

зи бахшиш чаҳ суд эй ба бахшиш мисл

ز بخشش چه سود ای به بخشش مثل

Чу ту ҳар чаҳ бахше сетанд аҷал

چو تو هر چه بخشی ستاند اجل

Чаҳ хуш гуфт ин нуктаи донои роз

چه خوش گفت این نکته دانای راز

Ки мпазири чизе ки гиранд боз

که مپذیر چیزی که گیرند باز

Фиребаст аз мурғ дар доми асир

فریب است از مرغ در دام اسیر

Задани мурғи бигушодаи парро сафир

زدن مرغ بگشاده پر را صفیر

Ба онаст кӯи доми худ брдрд

به آنست کو دام خود بردرد

На мурғ дигарро ба дом оварад

نه مرغ دگر را به دام آورد

Биёи соқио зон май роўгӣ

بیا ساقیا زان می راوگی

Ки сайди тарабро кунад ноўгӣ

که صید طرب را کند ناوگی

Бидиҳ то дарин доми дили ношикеб

بده تا درین دام دل ناشکیب

Бабандем гӯш аз сафири фиреб

ببندیم گوش از صفیر فریب

Биёи мтрбо ваон неи форсӣ

بیا مطربا وان نی فارسی

Ки бар Рахш ъушрат кунад форсӣ

که بر رخش عشرت کند فارسی

Бизан то ба ҳамроҳии он савор

بزن تا به همراهی آن سوار

Кунем аз биёбони меҳнати гузор

کنیم از بیابان محنت گذار