Яке марзбон буд дар марзи Марв

یکی مرزبان بود در مرز مرو

Занӣ дошт ориз чу гули қад чу сарв

زنی داشت عارض چو گل قد چو سرو

зи хайли ғуломони сиёҳяш буд

ز خیل غلامان سیاهیش بود

Ки пинҳон ба он зани нигоҳяш буд

که پنهان به آن زن نگاهیش بود

Басӣ дар миёни шӯру ғавғои гузашт

بسی در میان شور و غوغا گذشت

Ки бо вай яке гардад аммо нагашт

که با وی یکی گردد اما نگشت

Ба кин шуд бадали меҳри мудаббири ғулом

به کین شد بدل مهر مدبر غلام

Камари баст дар маърази интиқом

کمر بست در معرض انتقام

Ду тӯтии зи бозори мурғони харид

دو طوطی ز بازار مرغان خرید

Казон гӯнаи мурғон сулаймон надид

کزان گونه مرغان سلیمان ندید

Ба таълим ҳар як забон баргушод

به تعلیم هر یک زبان برگشاد

Ба розии забони нуктае ёд дод

به رازی زبان نکته ای یاد داد

Якеро нарафтӣ ҷузи ин бар забон

یکی را نرفتی جز این بر زبان

Ки шуд ёри ҳоҷиби зани марзбон

که شد یار حاجب زن مرزبان

Дигар гуфтӣ ин ҳоли бас равшан аст

دگر گفتی این حال بس روشن است

Вале гуфтани он на кор ман аст

ولی گفتن آن نه کار من است

Чу мурғони бад-ӣни нағма доно шуданд

چو مرغان بدین نغمه دانا شدند

Бар ин нуктаи гуфтан тавоно шуданд

بر این نکته گفتن توانا شدند

Ба хлўтгаҳи марзбони барадашон

به خلوتگه مرزبان بردشان

Ба маҳҷӯбаи хоси бспрдшон

به محجوبه خاص بسپردشان

Ҷузи ин нуктаи шани ҳеҷ дастон набӯд

جز این نکته شان هیچ دستان نبود

Вале марди мискини зиён дон набӯд

ولی مرد مسکین زیان دان نبود

Ба ъушрат ҳаме хӯрд май субҳу шом

به عشرت همی خورد می صبح و شام

Бидон нағмаи хуши хотиру шоди ком

بدان نغمه خوش خاطر و شاد کام

зи ногуҳи зарифии зи аъёни рай

ز ناگه ظریفی ز اعیان ری

Дар аснои он гашти меҳмони вай

در اثنای آن گشت مهمان وی

Ба меҳмони навозии тараб соз кард

به مهمان نوازی طرب ساز کرد

намеоварад ва май хӯрдан оғоз кард

می آورد و می خوردن آغاز کرد

Чу шуд гармаш аз оташ май димоғ

چو شد گرمش از آتش می دماغ

Барафрӯхт табъаш чу равшани чароғ

برافروخت طبعش چو روشن چراغ

Бигуфт он ду мурғи сухани соз ро

بگفت آن دو مرغ سخن ساز را

Ду хунёгари нағмаи пардоз ро

دو خنیاگر نغمه پرداز را

зи хлўтсрои сӯй ҷамъ оваранд

ز خلوتسرا سوی جمع آورند

Ки аз савташони ҷамъ ҷон парваранд

که از صوتشان جمع جان پرورند

Чу розии мақолот эшон шунид

چو رازی مقالات ایشان شنید

Сари хиҷлати андар гиребон кашид

سر خجلت اندر گریبان کشید

Бадв марзбон гуфт ҳол ту чист

بدو مرزبان گفت حال تو چیست

Вази ин хуши навоёни малол ту чист

وز این خوش نوایان ملال تو چیست

Таъаллул басӣ кард ва зон тобу печ

تعلل بسی کرد و زان تاب و پیچ

Надодаши халосӣ ба ҷузи рости ҳеҷ

ندادش خلاصی به جز راست هیچ

Чу шуд марзбони огаҳ аз сари кор

چو شد مرزبان آگه از سر کار

Баровард ғайрати зи ҷонаши дамор

برآورد غیرت ز جانش دمار

Ғуломи сияҳро сӯй хеш хонд

غلام سیه را سوی خویش خواند

Вази он қисса бо ваии сухан боз ронад

وز آن قصه با وی سخن باز راند

Бар он ҷумлаи ваии ҳам гувоҳӣ бидод

بر آن جمله وی هم گواهی بداد

Ба кафи теғи рӯи ҷониби зани ниҳод

به کف تیغ رو جانب زن نهاد

Ки эй хираи сари ин чаҳ дил тирагӣаст

که ای خیره سر این چه دل تیرگیست

Ки бар тираи гейти ин ҳама чирагӣаст

که بر تیره گیت این همه چیرگیست

Ман ӣнҷои таманноӣ ҳар кас ки чаҳ

من اینجا تمنای هر کس که چه

Ба бустони гули овезаши хас ки чаҳ

به بستان گل آویزش خس که چه

Ба доман задаш дасти к-эии комёб

به دامن زدش دست کای کامیاب

Аннани тараҳҳуми зи ҳолами мтоб

عنان ترحم ز حالم متاب

Манеҳ пои бурун аз раҳи ақлу ҳаш

منه پا برون از ره عقل و هش

Бипурс онгаҳ озод кун ё бикаш

بپرس آنگه آزاد کن یا بکش

Ғуломи туро орзӯии маҳол

غلام تو را آرزوی محال

Фитод аз ман бегунаҳ дар хаёл

فتاد از من بی گنه در خیال

Муяссар надид аз лабами коми хеш

میسر ندید از لبم کام خویش

Бгстрд дар роҳи ман доми хеш

بگسترد در راه من دام خویش

Кунун бастаи пари мурғ дом ваем

کنون بسته پر مرغ دام ویم

Гирифтори хашмат ба ком ваем

گرفتار خشمت به کام ویم

Марои ин ду тӯтӣ ки ҷон сӯхтанд

مرا این دو طوطی که جان سوختند

зи ваии ҳарф ҷонсӯзӣ омухтанд

ز وی حرف جانسوزی آموختند

Дарин ҳарфашони ҷузи вай устод нест

درین حرفشان جز وی استاد نیست

Ҷузи ин ҳарфи худ ҳеҷашон ёд нест

جز این حرف خود هیچشان یاد نیست

Бидонади азин хотири ҳӯшманд

بداند ازین خاطر هوشمند

Ки дар кори ман аз вай афтод банд

که در کار من از وی افتاد بند

Дили марзбони азин сухан нарм шуд

دل مرزبان ازین سخن نرم شد

Дигарбора дар меҳр ӯ гарм шуд

دگرباره در مهر او گرم شد

Ба лаби ғайри шукраш навое нарафт

به لب غیر شکرش نوایی نرفت

Ки бар ваии зи теғаш хатое нарафт

که بر وی ز تیغش خطایی نرفت

Паии нуктаи донони фаррухи сиришт

پی نکته دانان فرخ سرشت

Ба оби зари ин турфа посух навишт

به آب زر این طرفه پاسخ نوشت

Ки муҷрим чу гардад сазои уқоб

که مجرم چو گردد سزای عقاب

Хирадмандро ба диранг аз шитоб

خردمند را به درنگ از شتاب

Биёи соқиои ратл сангин биор

بیا ساقیا رطل سنگین بیار

Ки созад сбксорро бурдбор

که سازد سبکسار را بردبار

Ба рухсори умед ранг оварад

به رخسار امید رنگ آورد

Ба умри шитобон диранг оварад

به عمر شتابان درنگ آورد

Биёи мтрбо бар неи ангушт на

بیا مطربا بر نی انگشت نه

зи кораш ба ангушт бигушо гиреҳ

ز کارش به انگشت بگشا گره

зи ту ҳар кушодаш ки хоҳад афтод

ز تو هر گشادش که خواهد افتاد

Набошад ҷузи он кори моро кушод

نباشد جز آن کار ما را گشاد