Нӯшервони рӯзи наврӯз ё мҳрҷон маҷлис медошт , дид яке аз ҳозирон ки бо ваии нисбат хешӣ дошт ҷоми заррин дар бағали ниҳод , тағофул кард ва ҳеҷ нагуфт чун маҷлиси бршкст , шаробдор гуфт : ҳеҷ кас берун наравад то таҷассус кунем ки як ҷоми заррини дарме бояд .
نوشیروان روز نوروز یا مهرجان مجلس می داشت، دید یکی از حاضران که با وی نسبت خویشی داشت جام زرین در بغل نهاد، تغافل کرد و هیچ نگفت چون مجلس برشکست، شرابدار گفت: هیچ کس بیرون نرود تا تجسس کنیم که یک جام زرین درمی باید.
Нӯшервон гуфт : бигзор он кас ки гирифт боз нахоҳад дод ва он кас ки гирифт боз дид нмомӣ нахоҳад кард баъд аз чанд рӯзи он шахс даромад ҷомаҳои нави пӯшидау музеии нав дар по карда .
نوشیروان گفت: بگذار آن کس که گرفت باز نخواهد داد و آن کس که گرفت باز دید نمامی نخواهد کرد بعد از چند روز آن شخص درآمد جامه های نو پوشیده و موزه نو در پا کرده.
Нӯшервони ишорат ба ҷомаҳои вай кард ки инҳо аз онаст ваии доман аз музеии бардошт ки ин низ аз онаст . Нӯшервон бихандед донист ки онро ба зарурат эҳтиёҷ карда буд , бифармуд то ҳазор мисқоли зар ба вай диҳанд .
نوشیروان اشارت به جامه های وی کرد که اینها از آن است وی دامن از موزه برداشت که این نیز از آن است. نوشیروان بخندید دانست که آن را به ضرورت احتیاج کرده بود، بفرمود تا هزار مثقال زر به وی دهند.
Аз гуноҳи ту чу огоҳ шавад шоҳи Карим
از گناه تو چو آگاه شود شاه کریم
Мӯътариф бош ба он вази карамаш узр бихоҳ
معترف باش به آن وز کرمش عذر بخواه
Макун инкори гунаҳ зонка гуноҳ дигар аст
مکن انکار گنه زانکه گناه دگر است
Балки бисёре азон ҳам бтар инкори гуноҳ
بلکه بسیاری ازان هم بتر انکار گناه