Ғамат то дар дилами манзили гирифтаи сет

غمت تا در دلم منزل گرفته ست

зи шодии ҷаҳонами дили гирифтаи сет

ز شادی جهانم دل گرفته ست

Мапурс аз ман шумори ақди он зулф

مپرس از من شمار عقد آن زلف

Ки ақли он уқдаро мушкили гирифтаи сет

که عقل آن عقده را مشکل گرفته ست

Ту дарёӣу зоҳиди хушк азон монад

تو دریایی و زاهد خشک ازان ماند

Казин дарёи раҳи соҳили гирифтаи сет

کزین دریا ره ساحل گرفته ست

Мабанд эй сорибони маҳмил ки имрӯз

مبند ای ساربان محمل که امروز

Сиришками роҳ бар маҳмили гирифтаи сет

سرشکم راه بر محمل گرفته ست

Дилам бо чашми хўнризи ту сайдии сет

دلم با چشم خونریز تو صیدی ست

Ки сайёдаши паии бсмли гирифтаи сет

که صیادش پی بسمل گرفته ست

Ба кӯии ишқ азон кас ҳосилӣ нест

به کوی عشق ازان کس حاصلی نیست

Ки роҳи зуҳд бе ҳосили гирифтаи сет

که راه زهد بی حاصل گرفته ست

зи ҷомати ҷуръае нохӯрдаи ҷомӣ

ز جامت جرعه ای ناخورده جامی

Чаҳ худро масти лоиъқли гирифтаи сет

چه خود را مست لایعقل گرفته ست