Ғамати рӯзи марои расми шаби омухт

غمت روز مرا رسم شب آموخت

Диламро тобу ҷонамро таби омухт

دلم را تاب و جانم را تب آموخت

Макун дар гиря ҳар дами айби чашмам

مکن در گریه هر دم عیب چشمم

Ки ин гўҳрФшонӣ зон лаби омухт

که این گوهرفشانی زان لب آموخت

Надидам ҳеҷ мазҳаби хуштар аз ишқ

ندیدم هیچ مذهب خوشتر از عشق

Хушо он роҳрави кини мазҳаби омухт

خوشا آن راهرو کین مذهب آموخت

Фурӯи шӯй эй муаллими лавҳи бедод

فرو شوی ای معلم لوح بیداد

Ки ёри ин ҳарфи пеш аз мактаби омухт

که یار این حرف پیش از مکتب آموخت

Стодн нест ашкамро надонам

ستادن نیست اشکم را ندانم

Ки ин сайр аз кадомин кавкаби омухт

که این سیر از کدامین کوکب آموخت

Дилами давр аз рахт то субҳдами дӯш

دلم دور از رخت تا صبحدم دوش

Ба моҳу Зуҳраи оҳ ва ёрб омухт

به ماه و زهره آه و یارب آموخت

Наҷуед ҷузи шароби лаъли ҷомӣ

نجوید جز شراب لعل جامی

Азон дам каз лабати ин машраби омухт

ازان دم کز لبت این مشرب آموخت