зи меҳр рӯй ту ҳар шаб кунам назораи субҳ
ز مهر روی تو هر شب کنم نظاره صبح
Нуҳум сиришк фишон чашм бар ситораи субҳ
نهم سرشک فشان چشم بر ستاره صبح
Занад ба сидқ чу ман дами зи меҳри хуршедӣ
زند به صدق چو من دم ز مهر خورشیدی
Вагарна чист гиребони пораи пораи субҳ
وگرنه چیست گریبان پاره پاره صبح
Саводи турраи шбрнги гирди оризи ту
سواد طره شبرنگ گرد عارض تو
Сиёҳии шаб тирааст бар канораи субҳ
سیاهی شب تیره است بر کناره صبح
Чунон баланд шуд оҳанги мо ки нашносанд
چنان بلند شد آهنگ ما که نشناسند
Ки ин нафири шаби мост ё нақораи субҳ
که این نفیر شب ماست یا نقاره صبح
Алии алсбоҳ ба рӯй туам фитод назар
علی الصباح به روی توام فتاد نظر
Сабоҳи ман ҳама шуд хайр аз истихораи субҳ
صباح من همه شد خیر از استخاره صبح
зи субҳи дам чаҳ занам бо сафои талъати ту
ز صبح دم چه زنم با صفای طلعت تو
Надошт каси шаби торик дар шумораи субҳ
نداشت کس شب تاریک در شماره صبح
зи бас ки ваҷҳи шабаҳ равшанаст аз аҳли сухан
ز بس که وجه شبه روشن است از اهل سخن
Хушаст дар сифати рӯяти истиораи субҳ
خوش است در صفت رویت استعاره صبح
Тулӯъ агар накунад Зуҳра аз уфуқи ҷомӣ
طلوع اگر نکند زهره از افق جامی
Басаст гавҳари назми ту гӯшвораи субҳ
بس است گوهر نظم تو گوشواره صبح