Шаби моҳи идро зи шафақи чарх ҷилва дод
شب ماه عید را ز شفق چرخ جلوه داد
Бар кафи ҳарифи лаъли қабои ҷоми зари ниҳод
بر کف حریف لعل قبا جام زر نهاد
Хунини дилӣ ки буд ҷигари бастаи ашк ӯ
خونین دلی که بود جگر بسته اشک او
Бар рӯй зарди як сари нохуни ҷигари кушод
بر روی زرد یک سر ناخن جگر گشاد
Неи не ки наъли зар ба бисотӣ ки ёфт ранг
نی نی که نعل زر به بساطی که یافت رنگ
Аз хӯни душманони зи сами асб шаҳ фитод
از خون دشمنان ز سم اسب شه فتاد
Шоҳӣ ки дар мақоми ғуломяши моҳи ид
شاهی که در مقام غلامیش ماه عید
Хам кард пушти хешу паии хизмати истод
خم کرد پشت خویش و پی خدمت ایستاد
Ҷони расидагон ба мўоъиди лутф ӯ
جان رسیدگان به مواعید لطف او
Чун табъи норасида ба умеди иди шод
چون طبع نارسیده به امید عید شاد
Рӯзаш буд ҳамеша зи бахти Саиди ид
روزش بود همیشه ز بخت سعید عید
Чашми бади замонаи зи идаши баъӣди бод
چشم بد زمانه ز عیدش بعید باد
Ҷомӣ ки моҳи талъат ӯ дид ва ид кард
جامی که ماه طلعت او دید و عید کرد
Ҳошо ки ҳаргиз оядаш аз моҳи иди ёд
حاشا که هرگز آیدش از ماه عید یاد