Хокӣ ки зери пои худ он шӯх биспурад

خاکی که زیر پای خود آن شوخ بسپرد

Сад ҷон баҳо диҳанд агар пои биФшрд

صد جان بها دهند اگر پا بیفشرد

Муштоқи каъбаро зи бисоти ҳарир ба

مشتاق کعبه را ز بساط حریر به

Реги ҳарам ки дар таҳи паҳлуи бгстрд

ریگ حرم که در ته پهلو بگسترد

Мӯе шудам зи фақру фанои кӯи қаландарӣ

مویی شدم ز فقر و فنا کو قلندری

Кини мӯиро ба покии таҷреди бистарад

کین موی را به پاکی تجرید بسترد

Гармии мҷу ба маҷлиси воъиз ки мустамеъ

گرمی مجو به مجلس واعظ که مستمع

Гар бошад оташ аз дами сардаши биФсрд

گر باشد آتش از دم سردش بیفسرد

Бар ман ба рӯзи ҳиҷри з ҷон нест миннатӣ

بر من به روز هجر ز جان نیست منتی

Айёми маргро хирад аз умр нашимурд

ایام مرگ را خرد از عمر نشمرد

Ман он ним ки саркашам аз ҳукми теғ ӯ

من آن نیم که سرکشم از حکم تیغ او

Сад бор агар чу шамъи серумро зи тани барад

صد بار اگر چو شمع سرم را ز تن برد

Ҷомии ҳарифи аҳли дарин бзмгаҳ наёфт

جامی حریف اهل درین بزمگه نیافت

Бар ваии мгири хӯрда агар май наме хӯрд

بر وی مگیر خورده اگر می نمی خورد