Навид омаданат медиҳанд ҳар рӯзам

نوید آمدنت می دهند هر روزم

Ту фориғӣ ва ман аз интизор май сӯзам

تو فارغی و من از انتظار می سوزم

Чароғи айши ман аз тундбоди ҳиҷри ту мард

چراغ عیش من از تندباد هجر تو مرد

Биёи биё ки зи шамъ рахт барафрӯзам

بیا بیا که ز شمع رخت برافروزم

Ба сӯзани мижа зон ришта май кашам аз ашк

به سوزن مژه زان رشته می کشم از اشک

Ки дидаи рӯзи мулоқот дар рахти дузам

که دیده روز ملاقات در رخت دوزم

Шабами зи васли ту чун рӯз агар нахоҳад шуд

شبم ز وصل تو چون روز اگر نخواهد شد

зи ҳиҷр ту нашавад кошкӣ чу шаби рӯзам

ز هجر تو نشود کاشکی چو شب روزم

Чу бар саодат васлат намешавам фирӯз

چو بر سعادت وصلت نمی شوم فیروز

Чаҳ суди толеъи масъӯду бахти фирӯзам

چه سود طالع مسعود و بخت فیروزم

Ҳуҷуми ишқи ту маҷнӯни сифат халосӣ дод

هجوم عشق تو مجنون صفت خلاصی داد

зи ақл маслиҳат омӯз дониш андӯзам

ز عقل مصلحت آموز دانش اندوزم

Магӯ ки назми ту ҷомӣ латофатӣ дорад

مگو که نظم تو جامی لطافتی دارد

Ки ман адои сухан аз лаб ту омӯзам

که من ادای سخن از لب تو آموزم