Зиҳӣ ба ваъдаи васли ту тозаи ҷону ҷаҳонам

زهی به وعده وصل تو تازه جان و جهانم

Биё ки бе ту зи дарду ғами фироқ ба ҷонам

بیا که بی تو ز درد و غم فراق به جانم

Ғам фироқ надонам чигуна пеш ту гӯям

غم فراق ندانم چگونه پیش تو گویم

Ки чун рухи ту бубинам равад зи кори забонам

که چون رخ تو ببینم رود ز کار زبانم

Бубахш мансаб фаррошем ки он сари кӯ ро

ببخش منصب فراشیم که آن سر کو را

Ба дидаи хоки брўбми зи гиря об фишонам

به دیده خاک بروبم ز گریه آب فشانم

Агар зи кӯии ту хории хулд ба пои сгонт

اگر ز کوی تو خاری خلد به پای سگانت

Ба сӯзани мижа берун кунам ба дидаи нишонам

به سوزن مژه بیرون کنم به دیده نشانم

Ба ҷурми ишқи тугар май кашанди гӯи бкшидм

به جرم عشق تو گر می کشند گو بکشیدم

Ки ман нуҳуфтан ин роз беш азин натавонам

که من نهفتن این راز بیش ازین نتوانم

Ман он ним ки шумории марои зи силки ғуломон

من آن نیم که شماری مرا ز سلک غلامان

Ҳамин басаст ки дории гуҳии зи хайли сгонм

همین بس است که داری گهی ز خیل سگانم

Чу хонам аз ғами ту дарднок гуфта ҷомӣ

چو خوانم از غم تو دردناک گفته جامی

Ҳазор сӯхтаи дилро зи дидаи хӯни бчконм

هزار سوخته دل را ز دیده خون بچکانم