эй ҳамаи симброни санги ту бар синаи занон
ای همه سیمبران سنگ تو بر سینه زنان
Талхком аз лаб мегаван ту ширини даҳанон
تلخکام از لب میگون تو شیرین دهنان
Бо гулу булбул агар бод на буии ту расонад
با گل و بلبل اگر باد نه بوی تو رساند
Он чаро ҷома дарон омад ва ин наъраи занон
آن چرا جامه دران آمد و این نعره زنان
Далқи солуси марои парда номӯс дарид
دلق سالوس مرا پرده ناموس درید
Ҷилваи танги қабоёни тнки перҳанон
جلوه تنگ قبایان تنک پیرهنان
Чун наранҷам ки дарин базм тараб напасанданд
چون نرنجم که درین بزم طرب نپسندند
Як туранҷам ба каф аз ғабғаби симини зқнон
یک ترنجم به کف از غبغب سیمین ذقنان
Бар дар пери харобот ки хмхонаҳ ӯ
بر در پیر خرابات که خمخانه او
Боди мҳрўси зи санги ситами хами шиканон
باد محروس ز سنگ ستم خم شکنان
намезадам ҳалқаи баромади зи даруни овозӣ
می زدم حلقه برآمد ز درون آوازی
К-эии туро хотами давлати гарави аҳриманон
کای تو را خاتم دولت گرو اهرمنان
Сокини хонқаҳ ва мадриса мебош ки нест
ساکن خانقه و مدرسه می باش که نیست
Кунҷи майхонаи мо ҷузи ватан бе ватанон
کنج میخانه ما جز وطن بی وطنان
Лоф қӯт мазан эй пашшаи оҷиз ки шикаст
لاف قوت مزن ای پشه عاجز که شکست
Зери ин бори гарони пушти ҳамаи пилтанон
زیر این بار گران پشت همه پیلتنان
Ҷомии ин назми ҳасангар бифиристади сӯии Форс
جامی این نظم حسن گر بفرستد سوی فارس
Ҳофизаши ном наад хусрави ширини суханон
حافظش نام نهد خسرو شیرین سخنان