Рӯзӣ ки май сиришти фалаки обу хоки ман
روزی که می سرشت فلک آب و خاک من
Май сӯхти зи оташи ту дили дардноки ман
می سوخت ز آتش تو دل دردناک من
Сарриштаи висоли ту гар омадӣ ба каф
سررشته وصال تو گر آمدی به کف
Пайванд ёфтӣ ҷигари чоки чоки ман
پیوند یافتی جگر چاک چاک من
Ҳар чанд дили зи ёрии худ поки бинмт
هر چند دل ز یاری خود پاک بینمت
Донам сироятии бикунади ишқи поки ман
دانم سرایتی بکند عشق پاک من
Рӯзӣ ки менавишт қазои номаи аҷал
روزی که می نوشت قضا نامه اجل
Шуд номзад ба теғи ҷафояти ҳалоки ман
شد نامزد به تیغ جفایت هلاک من
Ҷомии мҷўии хуши дилӣ аз ман ки дар азал
جامی مجوی خوش دلی از من که در ازل
Омехтанд бо ғаму дарди обу хоки ман
آمیختند با غم و درد آب و خاک من