Ману фикри ту чаҳ байнам ба ҷамоли дгарон
من و فکر تو چه بینم به جمال دگران
Ҳам хаёли ту маро ба ки висоли дгарон
هم خیال تو مرا به که وصال دگران
Ғайритем бар ту чунонаст кигар даст диҳад
غیرتم بر تو چنان است که گر دست دهد
Нагузорам ки даройӣ ба хаёли дгарон
نگذارم که درآیی به خیال دگران
Ба маҳолоти рақибон чаҳ наҳй самъи қабул
به محالات رقیبان چه نهی سمع قبول
Ҳоли мо гӯш кунӣ ба ки маҳоли дгарон
حال ما گوش کنی به که محال دگران
Рӯзу шаби ташнаи ҷигари хок дарат бӯсаи занам
روز و شب تشنه جگر خاک درت بوسه زنم
Ман ки лаб тар накунам зи оби зулоли дгарон
من که لب تر نکنم ز آب زلال دگران
Ҳар чаҳ ҷузи дӯст бурун мекунам аз хилвати дил
هر چه جز دوست برون میکنم از خلوت دل
Кӣ буд дар ҳарами шоҳи маҷоли дгарон
کی بود در حرم شاه مجال دگران
Май баради нома ӯ ҳудҳуд ва мо даври дареғ
میبرد نامه او هدهد و ما دور دریغ
Ки паридан натавонем ба боли дгарон
که پریدن نتوانیم به بال دگران
Ҳоли ҷомии зи ғамати зор ва ту аз сангдилӣ
حال جامی ز غمت زار و تو از سنگدلی
Май гушойии назари лутф ба ҳоли дгарон
میگشایی نظر لطف به حال دگران