То намӯдӣ лаб ва чаҳ ғабғаб

تا نمودی لب و چه غبغب

Дили ман дар чаҳасту ҷон бар лаб

دل من در چه است و جان بر لب

Шаби ман рӯз кун зи талъати хеш

شب من روز کن ز طلعت خویش

эй шудаи рӯзи ман зи зулфи ту шаб

ای شده روز من ز زلف تو شب

Пеши ту офтоб нопидост

پیش تو آفتاب ناپیداست

Рӯзи равшани ниҳон буд кавкаб

روز روشن نهان بود کوکب

Ранҷа шуд хотирати з ёрб ман

رنجه شد خاطرت ز یارب من

Ман длхстаҳ чун кунам ёрб

من دلخسته چون کنم یارب

Пеши лаъли ту бар лаби ҷом

پیش لعل تو بر لب جام

Лаби нуҳуми байни камоли ҳасани талаб

لب نهم بین کمال حسن طلب

Фол некӯ гирифт ҳар ки бидид

فال نیکو گرفت هر که بدید

Ҳамчуи мусҳафи рухи ту дар мактаб

همچو مصحف رخ تو در مکتب

Калак ҷомӣ кашид хон сухан

کلک جامی کشید خوان سخن

Зад срирши салои ман ирғб

زد صریرش صلای من یرغب