Ту танги чашмии он шӯхи байн чу ноз кунад

تو تنگ چشمی آن شوخ بین چو ناز کند

Ки чашми сӯии муҳибон ба сарфа боз кунад

که چشم سوی محبان به صرفه باز کند

Чу илтимос нигоҳӣ кунам бипушади чашм

چو التماس نگاهی کنم بپوشد چشم

Чу он бахил ки дар бар гадо фароз кунад

چو آن بخیل که در بر گدا فراز کند

Кунад зи зуд шудани рӯзи васлро кӯтоҳ

کند ز زود شدن روز وصل را کوتاه

Шаби фироқи зи дайр омадан дароз кунад

شب فراق ز دیر آمدن دراز کند

Марв ба савмиъаи гӯ рӯй худ кушода мабод

مرو به صومعه گو روی خود گشاده مباد

Ки рӯй аҳли ҳақиқати сӯй муҷоз кунад

که روی اهل حقیقت سوی مجاز کند

Чаҳ суд рӯй ба миҳроб карданам чу маро

چه سود روی به محراب کردنم چو مرا

Хаёли абрӯӣ ӯ рахна дар намоз кунад

خیال ابروی او رخنه در نماز کند

Ба ҳар касе шавад омехта чу шеру шукр

به هر کسی شود آمیخته چو شیر و شکر

Ба сони оташу об аз ман эҳтироз кунад

به سان آتش و آب از من احتراز کند

Махоҳ чораи зи каси ҷомё ки кор онаст

مخواه چاره ز کس جامیا که کار آنست

Ки бе миёнчии ағёр корсоз кунад

که بی میانچی اغیار کارساز کند