Хезед ҳарифон ки ба майхона даройем
خیزید حریفان که به میخانه درآییم
Слх рамазонаст ба мерӯза гушойем
سلخ رمضان است به می روزه گشاییم
Дарди сртсбиҳ ва троўиҳ шуд охир
درد سرتسبیح و تراویح شد آخر
Гулбонги занони рух ба дар майкадаи соиим
گلبانگ زنان رخ به در میکده ساییم
Ҳар занг ки аз савми риёи оинаи дил
هر زنگ که از صوم ریا آینه دل
Бастаи сет ба ҷом месофӣ бизадойем
بسته ست به جام می صافی بزداییم
Тарсам кигар имшаби зи қадаҳ даст бидорем
ترسم که گر امشب ز قدح دست بداریم
Фардои зи надомати сарангушти бхоиим
فردا ز ندامت سرانگشت بخاییم
Мо дарди кшоним ки ҷамъияти хотир
ما درد کشانیم که جمعیت خاطر
Дарюзаи кунон аз назари аҳли сафойӣам
دریوزه کنان از نظر اهل صفاییم
Дорем ба кафи оинаи ҷом ки дар вай
داریم به کف آینه جام که در وی
Маҳбӯби азалро ба муҳибон бинмоӣем
محبوب ازل را به محبان بنماییم
Он қавм ки бе сабақи амал аҳл қабуланд
آن قوم که بی سبق عمل اهل قبولند
Ҷомӣ ба тараб кӯшу қадаҳи нӯш ки моием
جامی به طرب کوش و قدح نوش که ماییم