зи саҷдае ки набошад дар абрӯят рӯем

ز سجده ای که نباشد در ابرویت رویم

Ба пешат аз хуии хиҷлати ҷабин ҳаме шавем

به پیشت از خوی خجلت جبین همی شویم

Чунон зи меҳри ту пар шуд дилам ки май тобад

چنان ز مهر تو پر شد دلم که می تابد

Ҳилоли нури заҳр устихон паҳлуем

هلال نور زهر استخوان پهلویم

зи майли абрӯии ту дасти доштам чаҳ кунам

ز میل ابروی تو دست داشتم چه کنم

намерасад ба камони ту зӯр бозуем

نمی رسد به کمان تو زور بازویم

Шабӣ ки бе ту ба зонуи ниҳодаи рўгрим

شبی که بی تو به زانو نهاده روگریم

Ба як ду дам гузарад сайли хӯн з зонуем

به یک دو دم گذرد سیل خون ز زانویم

Бростони ту май истам ба қасди намоз

برآستان تو می ایستم به قصد نماز

Суҷуди хок даратро баҳона ме ҷӯям

سجود خاک درت را بهانه می جویم

Ба сони нуқтаи манам дармеона бесару пой

به سان نقطه منم درمیانه بی سر و پای

Гирифтаи доираи ишқи ту з ҳар сӯем

گرفته دایره عشق تو ز هر سویم

зи ҷоми ишқи Ғаззолӣ чу ҷомем шудаи маст

ز جام عشق غزالی چو جامیم شده مست

На бар абаси ғазал ошиқона ме гӯям

نه بر عبث غزل عاشقانه می گویم