Шаби хаёлат чу шавад пардагии манзари чашм

شب خیالت چو شود پردگی منظر چشم

То саҳар аз мижаи мсмори занам бар дар чашм

تا سحر از مژه مسمار زنم بر در چشم

Чашмам аз лаъл ту шуд ҳуққаи гавҳари бхром

چشمم از لعل تو شد حقه گوهر بخرام

То ба пои ту кашами ҳуққаи пургавҳари чашм

تا به پای تو کشم حقه پرگوهر چشم

Бурқаъи зулфи барандоз ки бас торик аст

برقع زلف برانداز که بس تاریک است

Бе маи талъати ту манзили пари ахтари чашм

بی مه طلعت تو منزل پر اختر چشم

Гар хаёли рухи ту шамъ надорад дар пеш

گر خیال رخ تو شمع ندارد در پیش

Ба шабистони хаёлат ки шавад раҳбари чашм

به شبستان خیالت که شود رهبر چشم

Дмбдми дили зи даруни чашма хӯн бигушоед

دمبدم دل ز درون چشمه خون بگشاید

То бишӯяд рақами ғайри ту аз дафтари чашм

تا بشوید رقم غیر تو از دفتر چشم

Баъди дидори ту чун оташи шавқами сӯзад

بعد دیدار تو چون آتش شوقم سوزد

Хиздми сад илми нури зи хокистари чашм

خیزدم صد علم نور ز خاکستر چشم

Чашми ман ҷумла даҳон шуд ки хӯрд хок дарат

چشم من جمله دهان شد که خورد خاک درت

Нест ҷузи хок дарат қӯт дигар дархури чашм

نیست جز خاک درت قوت دگر درخور چشم

Мижагар хушк вагартар ба раҳати ҷорўбист

مژه گر خشک وگر تر به رهت جاروبیست

Май кашами зери қадамҳои ту хушки ватар чашм

می کشم زیر قدمهای تو خشک وتر چشم

Ҷомии имшаб ки хаёли лаб ӯ меҳмон аст

جامی امشب که خیال لب او مهمان است

Пар мелаъл кун аз шишаи дили соғари чашм

پر می لعل کن از شیشه دل ساغر چشم