Ҳар шабии кони писар аз меҳр ба тамкин ман аст
هر شبی کآن پسر از مهر به تمکین من است
Сарв дар бистару хуршед ба болин ман аст
سرو در بستر و خورشید به بالین من است
Ҳар ки дид ашки маро хост бибинад рух ӯ
هر که دید اشک مرا خواست ببیند رخ او
Моҳро байн ки ғаромати каши парвин ман аст
ماه را بین که غرامتکش پروین من است
Ъшқбозӣ ба хами турраи симини зқнон
عشقبازی به خم طُرّهٔ سیمینذقنان
Гарчи куфраст валикин чаҳ кунам дайн ман аст
گرچه کفر است ولیکن چه کنم دین من است
То фитодааст маро аз лаби ту шӯр ба сар
تا فتاده است مرا از لب تو شور به سر
Ҳамаи ҷои васфи сухани гуфтани ширин ман аст
همه جا وصف سخن گفتن شیرین من است
Ҳури тӯбои қад агар хўондмт эй шӯх маранҷ
حور طوبی قد اگر خواندمت ای شوخ مرنج
Ин қусӯр аз тарафи пастии тахмин ман аст
این قصور از طرف پستی تخمین من است
Дузд агар зулфи туу ҳоким агар муфтии шаҳр
دزد اگر زلف تو و حاکم اگر مفتی شهر
Ончӣ монад ба каманди ин дили мискин ман аст
آنچه مانَد به کمند این دل مسکین من است
На аҷаби хости зи Ҷайҳуни ғазал ар мҷдолмлк
نه عجب خواست ز جیحون غزل ار مجدالملک
Ки худованди сухани хомаи мишкӣн ман аст
که خداوند سخن خامهٔ مشکین من است