Дилам чу коми ҳавас зон ду ноб гирифт
دلم چو کام هوس زان دو ناب گرفت
Дигар ба соқии кавсар ки аз шароб гирифт
دگر به ساقی کوثر که از شراب گرفت
Ба сайли ашки надомат касе ки тан дар дод
به سیل اشک ندامت کسی که تن در داد
Паии иморати ъқбои гулӣ дар об гирифт
پی عمارت عقبا گلی در آب گرفت
Хдогўост ки чизе ба хеши нспорд
خداگواست که چیزی به خویش نسپارد
Муҳосибӣ ки тавонад зхўд ҳисоб гирифт
محاسبی که تواند زخود حساب گرفت
Арақ фишон ҳиҷоб аз нигоҳи гарм ки шуд
عرق فشان حجاب از نگاه گرم که شد
Дигар ки аз гули рухсор ӯ гулоб гирифт
دگر که از گل رخسار او گلاب گرفت
Тавон ба ростӣ аз аҳли зулм боҷ сетанд
توان به راستی از اهل ظلم باج ستاند
Хаданги мо пари парвоз аз уқоб гирифт
خدنگ ما پر پرواز از عقاب گرفت
Занад ба рӯй чамани дасти рӯзи истиғно
زند به روی چمن دست روز استغنا
Саҳар ки мавҷи насим аз рахт ниқоб гирифт
سحر که موج نسیم از رخت نقاب گرفت
Фитад чу партави хуршед бар гули рӯйиш
فتد چو پرتو خورشید بر گل رویش
Гумон кунанд хилоиқ ки офтоб гирифт
گمان کنند خلایق که آفتاب گرفت
Ҳар ончии як нафас андӯхт аз дилами мижгон
هر آنچه یک نفس اندوخت از دلم مژگان
Збҳри ҷӯё дар қарнҳо саҳоб гирифт
زبحر جویا در قرنها سحاب گرفت