Фарёд чиқадрҳо хӯрд афсӯс бар имрӯз
فریاد چقدرها خورد افسوس بر امروز
Он кас ки на дандони фишурд бар ҷигари имрӯз
آن کس که نه دندان فشرد بر جگر امروز
Аз ёди биногваши ту дар боғи биҳиштам
از یاد بناگوش تو در باغ بهشتم
Дорад нафасами файзи ҳавои саҳари имрӯз
دارد نفسم فیض هوای سحر امروز
Фарёд ки аз оташи ишқ ту намонда аст
فریاد که از آتش عشق تو نمانده است
Як гӯшаи чашми ашки маро дар ҷигари имрӯз
یک گوشهٔ چشم اشک مرا در جگر امروز
Бар нолаи ман танг буд синаи саҳро
بر ناله من تنگ بود سینهٔ صحرا
Аз бори ғамам кӯҳ бибозад камари имрӯз
از بار غمم کوه ببازد کمر امروز
Пайдост ки бсмл шуда орзӯӣ кист
پیداست که بسمل شدهٔ آرزوی کیست
Аз болу пари афшонии мурғи саҳари имрӯз
از بال و پر افشانی مرغ سحر امروز
Соқӣ ба нигоҳии бФзо бе худем ро
ساقی به نگاهی بفزا بی خودیم را
Бехештанам кун ба ду ҷом дигар имрӯз
بی خویشتنم کن به دو جام دگر امروز
Дар хӯни таманнои сари кӯй ки ғалатед
در خون تمنای سر کوی که غلطید
Рангин ба хироми омадаи боди саҳари имрӯз
رنگین به خرام آمده باد سحر امروز
Саҳл аст напурсед агар ҳоли ту ҷӯё
سهل است نپرسید اگر حال تو جویا
Мастӣ ки з ҳолаш набӯд бо хабари имрӯз
مستی که ز حالش نبود با خبر امروز