Хуши он дам каз ҷафояши хўшдлӣ бунёд ме кардам
خوش آن دم کز جفایش خوشدلی بنیاد میکردم
Ба ин афсуни дилашро моил бедод ме кардам
به این افسون دلش را مایل بیداد میکردم
Чисони байнам ба доми турраи ?ути он мурғи дилҳо ро
چسان بینم به دام طرهات آن مرغ دلها را
Ки бар гирди ту май грдондм ва озод ме кардам
که بر گرد تو میگرداندم و آزاد میکردم
з чашмаш мегирифтам гоҳи дили гуҳ боз ме додам
ز چشمش میگرفتم گاه دل گه باز میدادم
Нигоҳашро ба илми дилбарӣ устод ме кардам
نگاهش را به علم دلبری استاد میکردم
Чу медидам дилашро моил бе тобии ошиқ
چو میدیدم دلش را مایل بیتابی عاشق
Ба андаки ҷавр ӯ донистаи сад фарёд ме кардам
به اندک جور او دانسته صد فریاد میکردم
Ба базми ҳайратам таън хамӯшӣ мезанад сӯсан
به بزم حیرتم طعن خموشی میزند سوسن
Агар ман ҳам забон май доштам фарёд ме кардам
اگر من هم زبان میداشتم فریاد میکردم
На имрӯзии сети ин бетобӣам ҷӯё ки чун ҷавҳар
نه امروزیست این بیتابیام جویا که چون جوهر
ПроФшонии миёни байза фӯлод ме кардам
پرافشانی میان بیضهٔ فولاد میکردم