Имрӯз чун тавон ба мудоро гиристан
امروز چون توان به مدارا گریستن
Бояд чу абри диҷлау дарё гиристан
باید چو ابر دجله و دریا گریستن
Дар мотами ҳусайни алӣ гар нарезӣ ашк
در ماتم حسین علی گر نریزی اشک
Бар ҳоли хеш гиря кун аз ногиристан
بر حال خویش گریه کن از ناگریستن
Корам дар ин ғамаст чу шамъи сари мазор
کارم در این غم است چو شمع سر مزار
Даврии зи халқ ҷустан ва танҳо гиристан
دوری ز خلق جستن و تنها گریستن
Чун доми моҳӣ аз ҳамаи тани чашмтар шӯй
چون دام ماهی از همه تن چشم تر شوی
Хоҳӣ ба муддаои дили мо гиристан
خواهی به مدعای دل ما گریستن
Мурғи кабоби вор аз ин ғам бар оташам
مرغ کباب وار از این غم بر آتشم
Кор манаст бо ҳамаи аъзо гиристан
کار من است با همه اعضا گریستن
Имрӯз агар з дида фишонӣ сиришки ғам
امروز اگر ز دیده فشانی سرشک غم
Фардо расад ба дод ту ҷӯё , гиристан
فردا رسد به داد تو جویا، گریستن
Аз ҳазрати ту чашми шафоат буд маро
از حضرت تو چشم شفاعت بود مرا
Дастам бигир рӯзи ҷазо ё гиристан !
دستم بگیر روز جزا یا گریستن!