зи доманӣ ки дами субҳ бар ҷаҳон ифшоанд
ز دامنی که دم صبح بر جهان افشاند
Ҷаҳони файз бар ин тира хокдон ифшоанд
جهان فیض بر این تیره خاکدان افشاند
Ръўнти қад ӯ дид шуълаи вази шарор
رعونت قد او دید شعله وز شرار
Нисори раҳгузараши хурдаҳои ҷон ифшоанд
نثار رهگذرش خرده های جان افشاند
Шуд оташами зи сари остин чу шамъи баланд
شد آتشم ز سر آستین چو شمع بلند
Сиришки гарми зи бас дидаам бар он ифшоанд
سرشک گرم ز بس دیده ام بر آن افشاند
Ба ғайри лухти дилу пора ҷигар набӯд
به غیر لخت دل و پارهٔ جگر نبود
Агар гулӣ ба сари турбатам тавон ифшоанд
اگر گلی به سر تربتم توان افشاند
Насими оҳи марои лухти лухти дил ба канор
نسیم آه مرا لخت لخت دل به کنار
Чу баргҳои гул аз бод меҳргон ифшоанд
چو برگهای گل از باد مهرگان افشاند
Фиғон ки шуълаи оҳами ҷудои зи анҷуманат
فغان که شعلهٔ آهم جدا ز انجمنت
Чу шамъ , оташи дил бар сар забон ифшоанд
چو شمع، آتش دل بر سر زبان افشاند
Расидааст ба ҷое турои латофати ҳасан
رسیده است به جایی ترا لطافت حسن
Ки гирди накҳати гул аз рахт тавон ифшоанд
که گرد نکهت گل از رخت توان افشاند
Дилам ки дар шикани зулфи ёр хӯн шуду рехт
دلم که در شکن زلف یار خون شد و ریخت
зи шохи сунбултар гӯйӣ арғавон ифшоанд
ز شاخ سنبل تر گویی ارغوان افشاند
Биё ки аз шафақи имшаб ба зӯри садамаи ишқ
بیا که از شفق امشب به زور صدمهٔ عشق
зи баси тпиди дилами хӯн бар осмон ифшоанд
ز بس طپید دلم خون بر آسمان افشاند
з хӯн фишонӣ мижгони ман таъаҷҷуб чист
ز خون فشانی مژگان من تعجب چیست
Ҳар ончӣ дар ғамат андӯхт дил ҳамон ифшоанд
هر آنچه در غمت اندوخت دل همان افشاند
Чаҳ рутбааст баҳори фаранги фари туро
چه رتبه است بهار فرنگ فرّ ترا
Ки дасти рад ба гули равза ҷинон ифшоанд
که دست رد به گل روضهٔ جنان افشاند
Хуши он дилӣ ки чу гарми ниёз пошӣ шуд
خوش آن دلی که چو گرم نیاز پاشی شد
Туро ба гирди сари нози нақд ҷон ифшоанд
ترا به گرد سر ناز نقد جان افشاند
Дилӣ ки дар шикани турраи ту расво шуд
دلی که در شکن طرهٔ تو رسوا شد
Чаҳ мояи оташи сӯзон ба дудмон ифшоанд
چه مایه آتش سوزان به دودمان افشاند
Нигоҳи шӯхи ту дар ҳар гушӯдани чашмӣ
نگاه شوخ تو در هر گشودن چشمی
Хутани хутан ба замини гирди серума дон ифшоанд
ختن ختن به زمین گرد سرمه دان افشاند
Нафас чу аз сафари чини зулф ӯ баргашт
نفس چو از سفر چین زلف او برگشت
Матоъи файз ба дили баҳр армағон ифшоанд
متاع فیض به دل بهر ارمغان افشاند
Кадоми дил ки на сайди хаданг ?има шуд
کدام دل که نه صید خدنگ ایما شد
Дамӣ ки абрӯӣ ӯ гӯша камон ифшоанд
دمی که ابروی او گوشهٔ کمان افشاند
зи забти нола ки кардам зи бими ғайри имшаб
ز ضبط ناله که کردم ز بیم غیر امشب
Чу шамъами оташи сӯзон дар устихон ифшоанд
چو شمعم آتش سوزان در استخوان افشاند
эй ҳиммат ҳар каси баланд парвоз аст
همای همت هر کس بلند پرواز است
Ҷаҳони файз чу хуршед ховарон ифшоанд
جهان فیض چو خورشید خاوران افشاند
Уқоби фитрати дунон чу дида аз мижгон
عقاب فطرت دونان چو دیده از مژگان
Фишонд агар пару болӣ дар ошён ифшоанд
فشاند اگر پر و بالی در آشیان افشاند
Ҳар онкии гашти ду дили ҳамчуи шишаи соъат
هر آنکه گشت دو دل همچو شیشهٔ ساعت
Ғубори тафриқаи пайваста дар миён ифшоанд
غبار تفرقه پیوسته در میان افشاند
Гузашти Юсуфи аҳди шабоб ва дар перӣ
گذشت یوسف عهد شباب و در پیری
Турои зи мӯӣ ба рӯи гирд корвон ифшоанд
ترا ز موی به رو گرد کاروان افشاند
Баннои иззати худро ба сайл хорӣ дод
بنای عزت خود را به سیل خواری داد
Касе ки оби рухи худ барои нон ифшоанд
کسی که آب رخ خود برای نان افشاند
зи шеъри фаҳм гзирӣ надорад аҳли сухан
ز شعر فهم گزیری ندارد اهل سخن
наме тавон балии ӣнқадар ройгон ифшоанд
نمی توان بلی اینقدر رایگان افشاند
Вай аз он ки азизони барии з инсоф анд
وی از آن که عزیزان بری ز انصاف اند
Ҳамеша дили сари нафрати азин ва он ифшоанд
همیشه دل سر نفرت ازین و آن افشاند
Биҷунбаш сари таҳсину гӯшаи абрӯ
بجنبش سر تحسین و گوشهٔ ابرو
Тавон бар аҳли сухани ганҷ шоягон ифшоанд
توان بر اهل سخن گنج شایگان افشاند
Бқдрдонии булбул , нигар ки мушти парӣ
بقدردانی بلبل، نگر که مشت پری
Ҳазор ҷони паии маъшӯқи хурда дон ифшоанд
هزار جان پی معشوق خرده دان افشاند
Чу ин қасида ба пер хирад расед аз ман
چو این قصیده به پیر خرد رسید از من
Маро ба сари гули таҳсини замон замон ифшоанд
مرا به سر گل تحسین زمان زمان افشاند
Забони васф сголндаҳам ба фарқи сухан
زبان وصف سگالنده ام به فرق سخن
Чаҳ мояи гул ки зи мадҳ хдоигон ифшоанд
چه مایه گل که ز مدح خدایگان افشاند
Эмоми динӣу дайни Мӯсои онкии абри кафш
امام دینی و دین موسی آنکه ابر کفش
Гуҳар ба ҷайби умед ҷаҳонён ифшоанд
گهر به جیب امید جهانیان افشاند
Шҳо тўӣӣ ки фалак бо ҳазор ъзу шараф
شها توئی که فلک با هزار عز و شرف
Ғубори роҳи ту бар фарқ Фрқдон ифшоанд
غبار راه تو بر فرق فرقدان افشاند
Чу он насим ки резад ба хоки хурдаи гул
چو آن نسیم که ریزد به خاک خردهٔ گل
Кафи Карими ту домони баҳр ва кон ифшоанд
کف کریم تو دامان بحر و کان افشاند
Абири буии баҳору гулоби шодобӣ
عبیر بوی بهار و گلاب شادابی
Насими халқи ту дар ҷайб гулистон ифшоанд
نسیم خلق تو در جیب گلستان افشاند
Ба рӯй меҳри магари гардӣ аз раҳ ту нишаст
به روی مهر مگر گردی از ره تو نشست
Ки нақди файз ба олами ҷаҳон ҷаҳон ифшоанд
که نقد فیض به عالم جهان جهان افشاند
Кадоми рӯз ки ботилсони субҳи фалак
کدام روز که باطیلسان صبح فلک
На аз дар ҳурмати гирд остон ифшоанд
نه از در حرمت گرد آستان افشاند
Сумуми қаҳри ту чун бо ҳавоӣ боғ омехт
سموم قهر تو چون با هوای باغ آمیخت
зи лолаи домани оташ ба бӯстон ифшоанд
ز لاله دامن آتش به بوستان افشاند
Кулоҳи шодӣ мисатон шавад чунонкии баланд
کلاه شادی مستان شود چنانکه بلند
Сари аду ба ҳавои теғат ончунон ифшоанд
سر عدو به هوا تیغت آنچنان افشاند
Фиканд теғи ту аз зарбатии ҳазорон сар
فکند تیغ تو از ضربتی هزاران سر
Чу гулбунӣ ки ба як ҷунбиш хазон ифшоанд
چو گلبنی که به یک جنبش خزان افشاند
Ҳамин замин на зи ту сабз шуд ки аз анҷум
همین زمین نه ز تو سبز شد که از انجم
Бар осмони карамати реза ҳои хон ифшоанд
بر آسمان کرمت ریزه های خوان افشاند
Ба каф чу хомаи марои мадҳи санҷи рой ту шуд
به کف چو خامه مرا مدح سنج رای تو شد
Чу шамъи равшании дида аз бенон ифшоанд
چو شمع روشنی دیده از بنان افشاند
Чу барги ғунчаи зи хуноб дил кунад рангин
چو برگ غنچه ز خوناب دل کند رنگین
Ба ком ҳар ки ба ҷузи мадҳ ӯ забон ифшоанд
به کام هر که به جز مدح او زبان افشاند
Дамӣ ки ҷӯё хоҳад гули муроди маро
دمی که جویا خواهد گل مراد مرا
зи хоки дарга ӯ бар сар осмон ифшоанд
ز خاک درگه او بر سر آسمان افشاند
Ба хеш , аҳд намудем ки баҳри баҳри гуҳар
به خویش، عهد نمودم که بحر بحر گهر
зи доман мижа хоҳам бар бар остон ифшоанд
ز دامن مژه خواهم بر بر آستان افشاند
Ҳамеша то ки ба ойин хеш хоҳад чарх
همیشه تا که به آئین خویش خواهد چرخ
Ғаму нишот ба фарқ ҷаҳонён ифшоанд
غم و نشاط به فرق جهانیان افشاند
Хушии насиб дилам кун чунонкии натавонад
خوشی نصیب دلم کن چنانکه نتواند
Ғубори ғам ба сараши даст осмон ифшоанд
غبار غم به سرش دست آسمان افشاند